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श्राद्ध/ Shraddh
श्राद्ध पक्ष
श्राद्ध/ Shraddh- श्राद्धशब्द का अर्थ पूर्वजों के प्रति श्रद्धापूर्वक अर्पण किए गए भाव से है। श्राद्ध भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है जिसमें हम अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन करते हैं व उन्हें स्मरण करते हैं । श्राद्ध पूर्वजों से जुड़ने का एक अनुपम उपाय है जिसमें हम भावी पीढ़ी को हमारे पूर्वजों के साथ विधिवत प्रकार से जोड़ पाते हैं।
श्राद्ध पक्ष का आरंभ–
भारतीय पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णमासी से श्राद्ध पक्ष का आरंभ होता है व आश्विन मास के कृष्ण पक्ष के 15 दिन तक निरंतर श्राद्ध पक्ष चलता है, इस प्रकार भाद्रपद की पूर्णिमा से आरंभ होकर आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक श्राद्ध पक्ष माना गया है।
श्राद्ध का विधान–
यद्यपि श्राद्ध के शास्त्रीय विधान व रीति नीति है। फिर भी श्राद्ध शब्द के शाब्दिक अर्थ से ही है सिद्ध है कि श्रद्धा के साथ में अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए उनके प्रति जल अर्पण, भोजनादि अर्पण करना। श्राद्ध अर्पण की सामग्रियों में पितृ तर्पण का महत्व है जहां तिलोदकम अर्थात तिल मिश्रित जल पितरों को अर्पण किया जाता है।

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