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गीता जयंती 2025: कुरुक्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का भव्य शुभारम्भ
गीता जयंती 2025: कुरुक्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का भव्य शुभारम्भ – कुरुक्षेत्र में आयोजित गीता जयंती 2025 एक 21 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजन है, जिसमें विविध धार्मिक कार्यक्रम, मेले, प्रदर्शनियाँ और भारत–विदेश के कलाकार शामिल होते हैं। यहाँ पढ़ें इस महोत्सव की सम्पूर्ण –
गीता महोत्सव
गीता महोत्सव– कुरुक्षेत्र में हर वर्ष हरियाणा सरकार द्वारा कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की पहल पर अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन किया जाता है। गीता जयंती–2025 का शुभारम्भ इस बार अत्यंत भव्य रूप में हुआ, जहाँ हरियाणा के महामहिम राज्यपाल श्री असीम कुमार घोष जी ने फीता काटकर मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी भी उनके साथ उपस्थित रहीं।
उद्घाटन के बाद महामहिम राज्यपाल ने परिवार सहित पूरे मेला परिसर का अवलोकन किया। कार्यक्रम में कुरुक्षेत्र विधायक श्री अशोक अरोड़ा और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव श्री उपेन्द्र बंसल भी मौजूद रहे।

🌟 गीता महोत्सव के विविध आयाम और बढ़ती लोकप्रियता
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव हर वर्ष प्रसिद्ध होता जा रहा है। भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ कई विदेशी देश भी इसमें प्रतिभाग करने लगे हैं।
इस महोत्सव में अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रतियोगिताएँ, क्राफ्ट मेला, धार्मिक आयोजन और अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियाँ होती हैं।
📅 महोत्सव की तिथि एवं अवधि 2025
इस वर्ष गीता जयंती उत्सव 15 नवंबर से 5 दिसंबर 2025 तक आयोजित किया जा रहा है।
यानी यह लगातार 21 दिनों तक चलेगा और प्रतिवर्ष की तरह लाखों श्रद्धालु, पर्यटक और कला-प्रेमी इसमें सम्मिलित होंगे।
मूल रूप से गीता जयंती मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है, परन्तु श्रीमद्भगवद्गीता के 18 अध्यायों को ध्यान में रखते हुए इस उत्सव को विस्तारित कर 18 दिन किया गया था, और इस वर्ष इसे 21 दिन तक आयोजित किया जा रहा है।
🕯️धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की झलक
इस मेले में प्रतिदिन विविध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है, जिनमें प्रमुख हैं—
- गीता पाठ
- गीता श्लोक उच्चारण
- सामूहिक गीता पाठ
- दीपदान
- लोकनृत्य
- गीता सेमिनार
- गीता क्विज
- शाम की आरती
- यज्ञ & भजन संध्या
🎓 इस वर्ष के गीता सेमिनार का मुख्य विषय
2025 के गीता सेमिनार का विषय है “धर्म”।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय गीता सेमिनार में दुनिया के कई देशों से शोधार्थी अपने शोधपत्र प्रस्तुत करते हैं।
इस वर्ष का एक अन्य प्रमुख विषय है — “गीतोक्त स्वधर्म”।
🛍️ मेला परिसर में राज्य और देशों की भागीदारी
इस उत्सव में भारत के उत्तरी राज्यों—
जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान
—से व्यापारी अपनी दुकानें लगाते हैं।
वहीं विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध खाद्य पदार्थों और क्राफ्ट की स्टॉलें मेले को और भी समृद्ध बनाती हैं।
🛒 मेले की विशेष पहचान
- कश्मीरी शॉल व साड़ियाँ
- हिमाचली ऊनी वस्त्र
- राजस्थानी परिधान
- पानीपत की जूतियाँ
- मिट्टी के बर्तन
- सजावट की वस्तुएँ
- गोहाना की देशी घी की जलेबी
इस वर्ष महोत्सव के पार्टनर राज्य – मध्यप्रदेश
और पार्टनर कंट्री – ऑस्ट्रेलिया हैं।
🌅 ब्रह्मसरोवर – गीता उपदेश स्थल का महत्व
गीता जयंती महोत्सव का मुख्य आयोजन पवित्र ब्रह्मसरोवर पर होता है।
ऐसा माना जाता है कि यहीं भगवान कृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था।
रात्रि में दीपों की रोशनी में ब्रह्मसरोवर का दृश्य अत्यंत मनमोहक होता है, जो हर आगंतुक के मन में अविस्मरणीय स्मृति छोड़ जाता है।
🎭 देश-विदेश की झलक और सांस्कृतिक प्रदर्शनी
यह उत्सव एक ही स्थान पर भारत की विविध संस्कृति और विश्व कला का दिव्य संगम प्रस्तुत करता है।
यहाँ—
- अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक नृत्य
- तंजानिया की सांस्कृतिक झलक
- उड़ीसा एवं हरियाणा पवेलियन
- विश्व संस्कृति प्रदर्शनी
—देखने का अवसर मिलता है।
विभिन्न व्यंजनों की स्टॉलें भी आकर्षण का बड़ा केंद्र हैं, जैसे—
जलेबी, सूखे मेवे, डोसा, पिज्जा, बर्गर, गोलगप्पे, पापड़, आइसक्रीम, जूस आदि।
🕉️ निष्कर्ष – गीता जयंती का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व
गीता जयंती केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि महाभारत और गीता की संस्कृति को जीवित रखने का महान प्रयास है।
देश–विदेश से लाखों लोग कुरुक्षेत्र पहुँचकर इस दिव्य अनुभव का आनंद लेते हैं।
ब्रह्मसरोवर की शांति, गीता का अध्यात्म, और भारतीय संस्कृति की समृद्ध झलक—
यह सब मिलकर गीता जयंती 2025 को एक अविस्मरणीय उत्सव बनाते हैं।

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