Your cart is currently empty!
कुरुक्षेत्र से हिमाचल शैक्षणिक भ्रमण वृत्तान्त
मेरा अनुभव
मेरा अनुभव
मेरा नाम सरिता है, मैं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संस्कृत एंव प्राच्य विद्या संस्थान की विद्यार्थी हूँ। हमारा टूर 6 अप्रैल 2024 को ऊना( हिमाचल प्रदेश) के लिए गया।
हम 6 विद्यार्थी 1 शोध छात्रा और हमारे गुरु जी डॉ विनोद कुमार जी थे। इस टूर में मैंने अनेक परिस्थितियों का सामना किया। मैंने इस टूर का पूरा हिसाब रखा। जोकि मैं विस्तार से बताती हूँ।
कुरुक्षेत्र 3rd गेट:-
मैंने एक ओटो वाले अंकल से बात की रात के 11 बजे रेलवे स्टेशन तक छोड़ कर आने के लिए। लेकिन अंकल ने एक सवारी के 20 rs मागें ।
मैंने अंकल को बोला हम तो 100 rs देगें । तो अंकल ने हाँ कर दी ओर रात के 11 बजे हमे रलेवे स्टेशन पर छोड़ कर आए। हमने रेलवे स्टेशन पर बहुत चित्र लिए , बहुत मस्ती की।
सर ने कहा 500-500 rs सरिता के पास जमा करवा दों।
हम सबने 500-500rs इकठ्ठे किए। सब के पैसे मेरे पास थे। हम आठ लोग थे तो मेरे पास 4000rs इकठ्ठे हो गए। और मैंने उन पैसों में से टिकट ली , कुरुक्षेत्र से अम्ब अन्दौरा तक की टिकट ली। एक टिकट 95rs की थी । तो मैंने उनको 760rs दिए।
अम्ब अन्दौरा:-
हम हब सुबह के आठ बजे अम्ब पहुंच गये।
वहां रेलवे स्टेशन पर से ही बस स्टैंड जाने के लिए ओटो बुक किया। अंटी 20rs सवारी ले रही थी। वहां पर अंटी ओटो चला रही थी। हम सभी ओटो में बैठ गये। हम सभी बस स्टैंड पहुंच गये। अंटी ने कहा 160rs दे दो, मैंने बोला 150rs ले लो। अंटी ने 150rs ही ले लिये। हम बस स्टैंड से चम्बापतन के लिये बस में बैठ गए। परिचालक ने बोला एक सवारी के 60rs लगेंगे। मैंने उसको 480rs दे दिए। ओर आठ टिकट उससे मैंने ले ली।
हम थोड़ी देर बाद चम्बापतन पहुंच गए। हमें वहां पुरुषोतम् गुरु जी लेने के लिये आए। केंन्द्रिय संस्कृत विश्वविद्यालय (वेदव्यास परिसर बलाहर: ) में लेकर आए। ओर हमने वहां पर चित्र लिये, बहुत मस्ती की।
बलाहर: में हमने खाना खाया । एक प्लेट खाने की 60rs की थी, तो मैंने उनको 480rs दे दिये। खाने के बाद पुरुषोतम् गुरु जी ने हमें आईसक्रिम खिलाई। मैंने वहां पर भी चित्र लिये।
खाना खिलाने ओर आईसक्रिम खाने के बाद सर हमें व्यास नदी में लेकर गये। हम सब ने नदी में स्नान किया। बहुत मस्ती की, ओर बहुत सारे चित्र भी लिये।
हमनें व्यास नदी में स्नान करते हुए , बहुत मस्ती की।
व्यास नदी में स्नान करने के बाद हम गेस्ट हाऊस में चले गए।
हमनें इस गेस्ट हाऊस में विश्राम किया। हम शाम के 4 बजे कालशेवर मन्दिर में जाने के लिये तैयार हुए। हमें वहां तक जाने के लिये, गाड़ी नही मिल रही थी। हम सब पैदल चल पड़े। रास्ते में जाते हुए बहुत मस्ती की, शहतूत खाये, ओर चित्र भी लिये।
रास्ते में एक टेम्पो मिला । सर ने अंकल से बात की हमें कलशेवर मन्दिर ले चलो। अंकल ने आने जाने का किराया 600rs मांगा।
मैंने अंकल से बात की ,अंकल हम तो 400rs देगें। अंकल बोला ठीक हैं। हमने वहां पहुच कर 50rs का प्रसाद लिया। ओर हमने मन्दिर में अच्छे से दर्शन किये। हम शाम को बलाहर आ गए। ओर छात्रावास भोजनालय में खाना खाया। खाना खा कर हम वापिस गेस्ट हाऊस में आ गए। रात को इस गेस्ट हाऊस में विश्राम किया।
उस टेम्पो वाले अंकल का व्यवहार देखकर हमने अगले दिन के लिये भी अंकल की गाड़ी को बुक कर लिया था। बलाहर से ज्वाला जी के लिये। अंकल बोले 800rs किराया लगेगा। मैंने अंकल से बात की हम सिर्फ जाने का किराया देगें।आप 8000rs बहुत ज्यादा ले रहे हो। हम आपको 400rs ही देगें। अंकल मान जाते हैं। हम सुबह के आठ बजे बलाहर से ज्वाला जी जाने के लिये तैयार हो जाते हैं। सबुह हमने पुरुषोतम् गुरु जी के परिवार के साथ चित्र लिये।
हम सब वहां से चल पड़े। ओर टेम्पो में आकर बैठ गये। हमनें टेम्पो में बैठकर बहुत मस्ती की, बहुत सारे चित्र लिये, अनुपम ने विडियो बनाई।
रास्ते में हमने एक ढ़ाबे पर चाय पी, बिस्केट खाये। मैंने उनको 130rs दिये। हमने वहां से 20rs की पानी की बोतल , 70rs के केले लिये।
हम ज्वाला जी 10 बजे तक पहुंच गये थे। मैंने अंकल को 400rs किराया दिया। हम सभी दर्शन करने के लिये मन्दिर में चले गये। मैंने वहां 101rs का प्रसाद लिया।मैंने वहां प्रसाद लेकर भी चित्र करवाया।
हम सभी लाईन में खड़े हो गये, दर्शन करने के लिये। तो सभी को प्यास लग रही थी। मैंने 20rs की पानी की बोतल ली। ओर सबने पानी पिया। हम सभी ने ज्वाला माता जी के दर्शन किये।
मेरे पास उस समय 880rs बच गये थे। मैंने सभी को बोला 500rs-500rs ओर इकठ्ठे कर लेते हैं। सभी ने मुझे फिर से 500rs-500rs दिये। मेरे पास 4,880rs इकठ्ठे हो गये थे। हम सब ने वहां से समान खरीदा । मैंने भी लिया,
हम सभी दर्शन करने के बाद बस स्टैंड पर आ गये। वहां पर परिचालक ने कहा एक सवारी के 60rs लगेगें। हम सभी बस में बैठ गये। लेकिन थोड़ी दूर बस चलने के बाद परिचालक बोला 850rs दे दो। मैंने कहा हमें एक सवारी के 60rs कहे थे। तो उसके हिसाब से पैसे देगें। मैंने कहा आपने हमें झूठ बोल कर बस में क्यूँ बैठाया। मैंने परिचालक के साथ बहुत देर तक बहस की, मैंने उसको 750rs दिये। ओर उनसे आठ टिकट ले ली। हमने रास्ते में 90rs के जीरा कोल्ड ड्रिंक पी, 20rs की पानी की बोतल ली।
हम शाम तक चामुण्डा जी पहुंच गये। हमने वहां चाय पी। जिसके पैसे अनुपम ने दिये 200rs। वहां हमने बहुत मस्ती की, चित्र लिये, ओर चामुण्डा माता जी के दर्शन किये।
माता जी के दर्शन करने के बाद लगंर खाया। ओर उसके बाद रूम बुक किया। वो 600rs एक रूम के मागं रहे थे। मैंने उनसे भी बात की हम दो रूम बुक करेगें। आप 1000rs ले लेना। लेकिन वो नहीं माने। मैंने उनको 1200rs दिये। 200rs कुसुम ने दिये।
हम सबुह पाँच बजे रूम में से तैयार होकर धर्मशाला(हिमाचल प्रदेश) जाने के लिये निकल पड़े। सुबह भी हमने चित्र लिये।
हम सभी ने सुबह चाय पी, बिस्केट खाये। ओर चाय पीते समय चित्र भी लिये।
चाय के पैसे अनुपम ने दिये 200rs। हम सभी चाय पी कर बस स्टैंड पर गये। लेकिन सुबह के समय वहां कोई भी बस नहीं थी। हम सभी पैदल चल पड़े। रास्ते में जाते समय हमने बहुत मस्ती की, बहुत सारे चित्र लिये।
हमने ओर भी बहुत सारे चित्र लिये। हम पैदल चल रहे थे। तो हमें रास्ते में एक गाड़ी मिल जाती हैं। हमने उस गाड़ी को बुक किया। गाड़ी वाला अंकल 2000rs किराया मागं रहा था। मैंने अंकल को बोला की हम 1500rs देगें । तो वो 1500rs में मान जाता हैं। हम सभी गाड़ी में बैठ जाते हैं। ओर थोड़ी देर बाद हम धर्मशाला पहुंच गये। हमने वहां धर्मशाला में मैक्लोडगंज झरना देखा। बहुत मस्ती की, बहुत सारे चित्र लिये।
हम सभी ने बहुत मस्ती की। ओर हम वापिस गाड़ी तक आते आते भी बहुत मस्ती की,चित्र लिये
।
गाड़ी वाला अंकल हमें धर्मशाला बस स्टैंड तक छोड़ कर गये। मैंने अंकल को 1500rs गाड़ी का किराया दिया। ओर हम वहां से कांगडा के लिए बस में बैठ गए। परिचालक बोला 350rs लगेंगे। मैंने बोला भाई किराया कुछ ज्यादा नही है मैंने परिचालक को 250rs दिये। ओर उन्होंने मुझे आठ टिकट दे दी। हम थोड़ी देर बाद कांगडा बस स्टैंड पर पहुंच गए। हमने कांगडा बस स्टैंड से अम्ब अन्दौरा के लिए बस में बैठ गये। कुसुम बस स्टैंड वाली दुकान से हम सब के लिये फ्रूट लेकर आई 390rs के। वह बस हरियाणा की थी, जो चण्डीगड जा रही थी। उस बस के परिचालक से सर ने किराया पूछा। तो अंकल बोले एक सवारी का 220rs लगेगा। हरियाणा की बस देखकर मेरी एक सहेली ने पूछा अंकल आप कहा से हो। अंकल बोले में खानपुर (रोहतक) से हूँ। मैंने कहा अंकल मेरी माँ भी आपके गाँव की हैं। मैंने उस अंकल को अपने नाना जी का नाम बताया वो पहचान गये। अंकल ने मेरे से किराया 1100rs लिया । 600rs कम किये किराये में से । 1000rs विनोद सर ने दिये, ओर 100rs मैंने, क्योंकि मेंरे पास पैसे कम बचे हुए थे। हम सभी तीन घंटे के बाद अम्ब पहुंच गए। हमने अम्ब बस स्टैंड के पास एक ढ़ाबे पर खाना खाया। जिसके पैसे भी 400rs सर ने ही दिये। हम सभी एक गाड़ी बुक करके रेलवे स्टेशन तक आये। अंकल बोले 160rs किराया दे दो। मैंने अंकल को कहा हमने आते समय 150rs दिया था। आप भी 150rs ही ले लो। अंकल ने 150rs ही लिये। हमने थोड़ी देर तक रेल का इतंजार किया। और कुछ देर बाद रेल आ गई , हम सब बहुत खुश हो रहे थे । मैंने रेलवे स्टेश से सबके लिये , जीरा कोल्ड ड्रिंक ली 145rs के । सर ने सबके लिए टिकट पहले से ही बुक कर रखी थी। 185rs एक टिकट का था। हम सब बहुत मस्ती कर रहे थे। मैंने सबका हिसाब किया। जिसके जितने ज्यादा पैसे लगे थे। मैंने प्रसाद भी आठ हिस्सों में बाँटा। और हमने रेल में भी
चित्र लिये।
हम सभी बहुत मस्ती करते हुए आये। हमारा टूर बहुत ही अच्छा रहा। और सर ने मुझे पैसो वाली जिम्मेदारी सौप रखी थी। मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला हैं। हम सभी 7:30pm पर कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन पर पहुंच गये थे।
सरिता
गाँव अदियाना , जिला पानीपत ।
मेरा अनुभव
Anjali
मेरा नाम अंजली है मैं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के “संस्कृत एवं प्राच्य विद्या संस्थान कि विद्यार्थी है। हमारा Tour अप्रैल 2024 को ऊना हिमान्चल प्रदेश 1 के लिए हम 6 विद्यार्थियों। शोध विद्यार्थी और हमारे गुरु श्री विनोद शर्मा जी के साथ रवाना हुआ। इस Tour में मैने अनक परिस्थितियों का सामना किया।
उन्हें मै विस्तार से बताती हूँ :-
कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन : –
हम सभी छात्र और मास्टर जी अपने अपने स्थान से सिविल हस्पताल पर एक साथ इकट्ठा हो कर रेलवे स्टेशन पहुंचे। अब पहुंच तो गए परंतु हमारी रेलको आने में अभी समय था। तब हमने रिलवे स्टेशन के विश्राम गृह हमें अपना अपना सामान एक जगह रखकर थोड़ा हंसी मजाक, कुछ तस्वीरें लीं। कुछ साथियों ने अपने अपने थैल से खाने का सामान निकाला। मैंने भी अपने थैले से मेरे द्वारा तैयार किया गया पोहा निकाला। हम सभी ने मजे लेते हुए आराम से खाया परंतु हमारे गुरु जी ने नहीं खाया क्योंकि वह रात्रि के भोजन के पश्चात् पुनः भोजन नहीं करते सभी खा-पीकर बैठ गए परंतु अभी भी रेल के आने में समय था। तो मुझे और मेरे 3 साथियों को चाय पीने की तलब हुई। क्योंकि हम सभी रेलवे स्टेशन बैठ कर यह अनुभव करना चाहते थे कि मध्य रात्रि के समय, रेलवे स्टेशन पर बैठ कर चाय पीने का अनुभव कैसा पूर बैठ कर चाय होता है?
चाय में भंग :-
चाय में भंग ऐसे हुआ कि जब हम स्टेशन से बाहर चाय लेने जा रहे थे तो हमने देखा कि सरकारी पुलिस कर्मी स्टेशन पर जमीन पर सोने वालों को अपनी लाठी से मारकर उठा रहा इसी बीच उनमें से आदमी ने पुलिस वाले से बहस कर ली। यह पुलिस वाले से बरदाश्त नहीं हुआऔर उसने उस गरीब आदमी पर अपनी लाठीयों बरसानी शुरुकुर दी यह देखकर मैं सहम गई और मेरा मन वापिस अपने साथियों के पास जाने को हुआ परंतु मेरे दोस्त अनुपम ने समझाया कि ऐसे सफ़र में हादसे होते रहते हैं ये बात को समझकर हम आगे चाय कि दुकान कि ओर चल दिए और वहाँ से चाय पैक करवाई और अपने साथियों के साथ बैठकर चाय का आनंद लिया ।
रेलगाड़ी का सफर : –
हम सभी अपने रेलगाड़ी के डब्बे में बैठ गए। शुरुआत में तो हमें सीट नहीं मिली परंतु कुछ एक डेढ़ घण्टे के बाद से सीट मिल गई और एक सरदार बाबा फकीर ने, आधे से ज्यादा रास्ते तक तो अपने ऊंची-ऊंची आवाज़ से बोल-बोलकर सभी को परेशान कर दिया। कुछ चार-पाँच घंटे के पश्चात हमने अपनी खिड़की से सूर्योदय होते देखा जो पहाड़ों के बीच, से बहुत ही खूबसूरत नज़र आ रहा था। उसके बाद हमने “भव्य नंगल डैम “देखा जो अत्यन्त खूबसूरत था और उसके कुछ समय के पश्चात हम अपने स्टेशन “अम्ब. अन्दौरा “उतर गए ।
अम्ब अन्दौरा से बलाहर तक का सफर :-स्टेशन से उतर कर हम सभी ने ऑटो लिया जिसकी चालक एक महिला थी जो पहाड़ी मेहनती और खूबसूरत महिला थी उसने हमे बस स्टैंड पर थोड़ा। बस स्टैंड से हमने बस ली काँगड़ा कि और हम “चम्बापतन ” उतरे । उतरते ही हमने, खूबसूरत दृश्य देखा पहाड़ो के बीच में पत्थरों के उपर से ठंडी-ठंडी हवा को मैहसूस किया और आँखों के सामने व्यास नदी देखी और उस नही के किनारे चलेते हुए हमें हमारी संस्कृत विश्वविद्यालयः वेदव्यासपरिसर बलाहर” के अतिथी गृह में पहुंचे ।
“केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय वेदव्यास– परिसर बलाहर का” अत्यन्त सुखद अनुभव–
परिसर में पहुंचने के बाद हमने अपना नाश्ता किया और उसके तुरंत बाद हमें हमारे परिसर वाले गुरु जी ‘पुरुषोत्तम महोदय’ का अपने आवास में चाय पर बुलावा आया और हम उनके घर गए चाय पी और उसके बाद पुरुषोतम गुरु जी हम सभी को व्यास नदी घुमाने ले गए। नदी के किनारे हमने पहाड़ी के बीच से निकलता हुआ शुद्ध शीतल जल पीया और हम ने नदी के किनारे सुंदर पत्थर देखें उसके बाद हमने व्यास में खूब नहाए धोए मजे से नदी के पानी में डुबकियां लगाई और नदी से नहा कर हम खेतों के बीच से निकलते हुए शहतूत खाई। उसके बाद हमने छोटी सी भोजनालय में भोजन किया और भोजन करके हम सभी ने अपने परिसर का भ्रमण किया जो कि बहुत खूबसूरत था। परिसर में हमने दोनों मन्दिरों के दर्शन किए। और पूरा परिसर का दौरा किया। उसके बाद हम शाम में ” ऐतिहासिक प्राचीन मन्दिर श्री कालीनाथ कालेश्वर महादेव मन्दिर ” के दर्शन को गए। दर्शन करके हम पुनः परिसर में आ गए और वहाँ हमने रात्रि का भोजन किया और खाने के पश्चात एक चक्कर मैदान का लगा कर विश्राम किया।
परिसर से ज्वालामुखी –
सुबह जल्दी उठकर नहा धोकर तैयार होकर हम परिसर से ज्वालादेवी मन्दिर के लिए टैम्पू में निकले रास्ते में हमने चाय नाश्ता किया और परिसर से 13 km दूर ज्वालादेवी मन्दिर पहुंचे।
वहाँ हमने एक दुकान से प्रसाद लेकर अपना सामान दुकान पर रखकर मन्दिर में लाइन में लग गए। करीब 4-5 घण्टे के बाद हमें माता ज्वालाजी दर्शन हुए । दर्शन करते ही मानो आत्मा त्रीप्त हो गई सारे सफर की थकान गायब हो गई हो। दर्शन के पश्चात् हमने ज्वाला जी का लंगर किया जो बहुत स्वादिष्ट था। और मंदिर से निकाल कर कुछ छोटी मोटी खरीदारी कर हम बस स्टैण्ड पहुंचे।
Muniya devi
1. शैक्षिक पर्यटन का सूक्ष्म परिचय
2. प्रस्तावना
3. शैक्षिक भ्रमण के उद्देश्य
4. शैक्षिक भ्रमण का महत्व
5. शैक्षिक भ्रमण का विवरण:-1) बलहार – हिमाचल प्रदेश
2) महाकालेश्वर मंदिर बरौली (हिमाचल प्रदेश)
3) ज्वाला माता मंदिर (हिमाचल प्रदेश)
4) चामुंडा देवी मंदिर (हिमाचल प्रदेश)
5) धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश)
8:47 pm✓✓
1
शैक्षिक पर्यटन
शैक्षिक पर्यटन का दिन :- शुक्रवार
शैक्षिक पर्यटन का दिनांक :- 5/04/2024
शैक्षिक पर्यटन का माहः- अप्रैल
शैक्षिक पर्यटन का चयनित स्थल :-1) बलाहर 2) महाकालेश्वर मंदिर बरौली
3) ज्वाला माता मंदिर
4) चामुंडा मंदिर
5) धर्मशाला
यात्रा आरंभ करने का स्थलः-कुरुक्षेत्र
विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र
यात्रा प्रारंभ करने का समय: रात्रि 1:30
शैक्षिक पर्यटन का साधन :- रेल द्वारा
पर्यटन में सम्मिलित छात्र व छात्राओं की संख्याः-छात्र :- १ छात्राएं:-६
शैक्षिक पर्यटन में सम्मिलित शिक्षित व शिक्षिकाएं :- शिक्षक :- १ शिक्षिकाए:- ०
शैक्षिक पर्यटन की समाप्ति तिथि:- 9/04/2024
प्रस्तावना
पर्यटन जीवन का प्रमुख अंग है। वर्तमान समय में शैक्षिक भ्रमण का शिक्षा के क्षेत्र में विशेष महत्व है। छात्र किसी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक अथवा धार्मिक स्थल का अवलोकन कर अपने ज्ञान का संवर्धन कर पाते हैं।
वर्तमान समय में शैक्षिक भ्रमण छात्रों को प्रत्यक्ष ज्ञान प्रदान करने में एक मात्र उपयोगी साधन है। परंतु किसी शैक्षिक भ्रमण उपाधदियता समुचित क्रियान्वयन पर निर्भर हैं। इस प्रकार प्रत्येक विषय की शिक्षा में शैक्षिक भ्रमण का स्थान और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। क्योंकि यह विज्ञान और विषय का समन्वित अध्ययन है। इसके द्वाराशिक्षा का नीरज वातावरण समाप्त हो जाता है। और छात्रों में रोचकता आती है। इस प्रकार / दृष्टि से पर्यटन की भूमिका मानव के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। 3
9:11 pmv.
शैक्षिक भ्रमण के उद्देश्य
शैक्षिक भ्रमण के निम्नलिखित उद्देश्य हैं:-
1) छात्रों में उत्तरदायित्व समझने एवं निरीक्षण करने की दशा का विकास करना।
2) शैक्षिक भ्रमण छात्रों को विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक धार्मिक महत्व तथा घटनाओं के बारे में जानकारी होना।
3) छात्रों में विभिन्न विषयों के प्रति रुचि विकसित करना।
4) सैद्धांतिक ज्ञान का संबंध व्यवहारिक ज्ञान से जोड़ना।
5) छात्रों में स्वयं अवलोकन एवं निरीक्षण करने की दशा का विकास करना।
6) प्राकृतिक वातावरण में अपनाएं गए नियमों को देखकर निष्कर्ष पर पहुंचना। 0.15
शैक्षिक भ्रमण का महत्व
भ्रमण द्वारा इतनी अधिक शैक्षिक लाभ होते हैं कि सभी का आसानी से वर्णन नहीं किया जा सकता। अंग्रेजी के प्रसिद्ध लेखक बेकन का कहना है कि “युवा के लिए भ्रमण शिक्षा का अंग है जबकि बड़े लोगों को इससे अनुभव मिलता है।”
शैक्षिक भ्रमण के महत्व के कुछ प्रमुख बिंदु का वर्णन निम्नलिखित है:-1) ज्ञान में वृद्धि भ्रमण हमारे किताबी ज्ञान में वृद्धि करता है। भ्रमण के सहारे इतिहास हमें वास्तविक दिखता है, तथा समूचा भूगोल सरकार हो उठता है। समाजशास्त्र की नींव मजबूत हो जाती है। ऐतिहासिक महत्व के स्थान के भ्रमण से पुस्तकों में पड़ी धुंधली छवि प्रकाशित होकर साकार हो जाती है।
2) संसार के व्यावहारिक ज्ञान की प्राप्ति : – भ्रमण संसार के व्यावहारिक ज्ञान को प्राप्त करने का सुनहरा अवसर प्रदान करती है। प्रसिद्ध कवि पोप ने ठीक ही कहा है कि “मानवता का सही अध्ययन मनुष्यों के अध्ययन से ही हो सकता है ब्राह्मण के दौरान तरह-तरह के व्यक्तियों से हमारा संपर्क होता है।”
3) स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य:- मस्तिष्क के स्वस्थ विकास के लिए भी भ्रमण अति आवश्यक है। रविंद्र नाथ टैगोर का कहना है की मन का स्वास्थ्य चुनी हुई पुस्तकों की जेल की दीवारों से
स्वास्थ्य चुनी हुई पुस्तकों की जेल की दीवारों से घिरे निश्चल स्कूल की गतिहीन कक्षाओं में पढ़ाई से नहीं सुधर सकता।
4) दृष्टिकोण विस्तृत होता है:-भ्रमण से हमारा दृष्टिकोण विस्तृत होता है। इससे हमारे विचारों और दृष्टिकोण में उदारता आती है। इसके द्वारा हमारे मन में मानवता के प्रति सहानुभूति जागृत होती है। विविध प्रकार के अनुभव पाकर हम घटनाओं और वस्तुओं को एक नई दिशा से देखना सीख जाते हैं, इससे मूल्य के प्रति हमारा शाहिद दृष्टिकोण विकसित होता है। 9:30 pm✓✓✓ 6
शैक्षिक भ्रमण का विवरण
हमारी यात्रा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के थर्ड गेट से प्रारंभ होती है। ऑटो की इस यात्रा के द्वारा हम कुरुक्षेत्र जंक्शन रेलवे स्टेशन पर उतारे गए। वहां से हमने अंब की टिकट ली। रेल का समय रात 1:30 बजे था जिसके दौरान हमने वहां मनोरंजन किया साथ में चाय का आनंद लिया। देखते ही देखते रेल का समय हो गया और हमने अपनी यात्रा को प्रारंभ किया। हम सभी हिमाचल प्रदेश सुबह 8:00 बजे पहुंचे गए जिसका विवरण इस प्रकार से है :—–
बलाहार हिमाचल प्रदेश
कहीं घंटे के सफर के बाद हम सभी सुबह 8:15 बजे वाला हर हिमाचल प्रदेश पहुंचे। बलहर पहुंचते ही हमने थोड़ा आराम किया। वहां पर हमारे गुरु जी के दोस्त रहते हैं, जो की कुरुक्षेत्र से ही रहने वाले हैं, उन्होंने हम सभी को चाय पर आमंत्रित किया। आराम करने के बाद हम सभी चाय पर उनके घर गए। चाय पीते पीते सर ने हमें वहां की यानी हिमाचल प्रदेश के बारे में बताया। चाय खत्म होते ही सर हमें वहां का प्राकृतिक माहौल दिखाने ले गए। वहां हमने पहाड़ों से आते पानी को भी पिया। यहां के पानी और वहां के पानी में बहुत अंतर था। पानी पीने में बहुत ही शीतल शुद्ध था, जिसे वहां के लोग पीने और घर का काम करने के लिए प्रयोग करते हैं। गुरुजी के दोस्त पुरुषोत्तम जी ने हमें वहां के व्यास नदी दिखाई, जिसमें हमने स्नान भी किया इसके दौरान पानी में तैरने की विधि भी बताई। उसे नदी में और उसके आसपास बहुत ही सुंदर पत्थर भी थे इसके रंग अलग-अलग थे। सभी विद्यार्थी वहां से सुंदर-सुंदर पत्थर भी लेकर आए हैं। हिमाचल प्रदेश में खास बात हमें यह देखने को मिली कि वहां पर जगह-जगह पर शहतूत के वृक्ष थे। जिससे हमने फलों का आनंद लिया। फिर हमने वहां दोपहर का खाना खाया और पुरुषोत्तम गुरु जी ने मीठे में कुल्फी खिलाई। उसके बाद हम सभी अपने अतिथि गृह आते-आते केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालयः वेद व्यासपरिसरः बलाहरः का भ्रमण करते हुए आए। केंद्रीय विश्वविद्यालय में भी बहुत सुंदर-सुंदर वृक्ष थे वहां का प्राकृतिक दृश्य हम देखते ही रह गए। पुरुषोत्तम गुरु जी ने हमें विश्वविद्यालय के सही स्थान के बारे में विस्तार से बताया। और वहां पर छात्र-छात्राओं के पढ़ने की शुल्क भी बहुत कम है। और छात्रों को छात्रवृत्ति भी दी जाती है।
विश्वविद्यालय का परा भ्रमण करके हम अपने
विश्वविद्यालय का पूरा भ्रमण करके हम अपने अतिथिगृह आए। फिर हमने वहां आराम किया, नहा धोकर फिर से हम शाम 5:00 बजे घूमने निकल गए।
9:42 pm
महाकालेश्वर मंदिर बरौली (हिमाचल प्रदेश)
महाकालेश्वर मंदिर घूमने तो हम सभी निकल पड़े लेकिन हमारे पास मंदिर जाने के लिए कोई भी साथ नहीं था। साधन के लिए हमने बात भी की किंतु वह मंदिर जाने के लिए काफी पैसे मांग रहे थे। लेकिन हमारे पास इतना बजट नहीं था तो हम पैदल ही वहां की प्राकृतिक सुंदरता देखने काफी दूर निकल गए। मंदिर बलाहर से 5 किलोमीटर दूर था। पैदल यात्रा करते हुए डेढ़ किलोमीटर दूर पहुंच गए। चलते-चलते हमें वहां एक वाहन मिला जो कि ऊपर से खुला था जिससे हवा आर पार हो रही थी। उस वाहन वाले से हमने बात की और वह कम पैसों से हमें मांकलेश्वर मंदिर ले जाने के लिए तैयार हो गए। तब हमें वहां ऐसा महसूस हुआ कि हमें साक्षात महादेव अपने दर्शन के लिए बुला रही हों। फिर हमने महादेव के दर्शन किए और आते समय बाजार का दृश्य देखा। उसके बाद हमने रात्रि का भोजन किया और अपने अतिथि गृह में जाकर सो गए। सुबह हम सभी जल्दी उठकर तैयार हो गए। हमने अगले स्थान का भ्रमण करने के लिए इस बहन वाले को बुला रखा था। हम सभी में पुरुषोत्तम गुरु जी को और उनके परिवार को फिर मिलेंगे कह कर आज्ञा ली।
ज्वाला माता मंदिर (हिमाचल प्रदेश)महाकालेश्वर मंदिर के बाद दूसरे स्थल घूमने आए जिसका नाम ज्वाला माता मंदिर था। वहां पहुंचकर कर पहले हमने अपना सारा सामान एक दुकान में रखा और वहीं पर हमने माता के सामान की टोकरी ली। माता काफी ऊंचे पर बैठी हुई है जो अपने भक्तों को अपने पास बुलाती रहती है। ऊपर चढ़ते चढ़ते हमें सांस चढ़ गई वहां पहुंचते ही हम लाइन में लगे हम सभी लाइन में लगभग 4:30 घंटे लग रहे हैं। लेकिन समय का बिल्कुल भी पता नहीं लगा क्योंकि वक्त माता की जयकारे लगाते रहेंगे जिससे बहुत चहल पहल थी और मनोरंजन था। वही माता के मंदिर में तीन-चार स्थल थे जिसमें जाकर के हमने दर्शन किए। वहां पर भक्तों के लिए सुरक्षाकर्मी भी थे। जिससे यात्रियों को किसी भी और असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके दौरान हमने ‘लंगर’ खाया जो की बहुत ही स्वादिष्ट था। हम सभी ने लंगर पेट पर खाया जिसे संतुष्ट हो गए। ज्वाला माता मंदिर से लौटे वक्त हमने अपने परिवार के लिए कुछ सामान खरीदा। उसके बाद हम बस स्टैंड से कांगड़ा की बस में चामुंडा देवी मंदिर गए तब समय शाम के 5:30 बज चुके थे। वहां पर भी हमारे गुरु जी के दोस्त मिले जिन्होंने हमारा सम्मान एक जगह रखवाया फिर उन्होंने हमें वहां के सभी जगह के बारे में बताया और भ्रमण करवाया। वहां पहुंचते ही हमने चामुंडा देवी के दर्शन किए साथ में वहां महादेव का भी स्थल था हमने वहां भी जाकर दर्शन किए। उसे जगह पर भी वहां ऐसे ऐसे स्थल थे जिसे देखकर हम आश्चर्यचकित रह गए। हमने ऐसा प्राकृतिक दृश्य आज तक नहीं देखा था। तब तक रात का समय हो गया था जिससे वहां का दृश्य और भी आकर्षित लग रहा था। चामुंडा देवी के मंदिर हम जब पहुंचे तब वहां आरती का समय हो गया था।
वहां की आरती देखकर मन बहत प्रसन्न हआवहां की आरती देखकर मन बहुत प्रसन्न हुआ क्योंकि आरती पूरे ढोल धमाकों के साथ हो रही थी। आरती के लिए वहां लोग बहुत भारी संख्या में पहुंचे हुए थे उसके बाद दर्शन करके हमने फोटोग्राफी की। ताकि हम बाद में उन फोटोस को भविष्य के लिए सहेज कर रख सके। उसके बाद हमने वही पर लंगर हॉल में रात्रि का भोजन किया। रात्रि बिताने के लिए हमने वहां पर रहने के लिए होटल देखें। थोड़ी सी मेहनत करने के पश्चात आखिरकार हमें रहने के लिए कमरे मिल गए। होटल में काम करने वाले सेवकों ने हमारे हरियाणा राज्य की तारीफ भी की। हरियाणा राज्य के साथ-साथ वहां के वासी यानी कि हमारी भी तारीफ की, क्योंकि हम उनके साथ बहुत ज्यादा घुल मिल गए थे और थोड़ा बहुत मजाक भी हुआ। वहां रात ठहर कर सुबह जल्दी 5:00 बजे तैयार होकर धर्मशाला के लिए निकल पड़े।
11:06 am✓✓✓
धरमशाला मैक्लोडगंज (हिमाचल प्रदेश)
मैक्लोडगंज, भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य के कांगड़ा जिले में स्थित धर्मशाला नगर का एक उपनगर है। धर्मशाला हिमाचल प्रदेश राज्य के कांगड़ा जिले में स्थित एक प्रमुख पर्यटन और दार्शनिय स्थल है। धर्मशाला कांगड़ा से 8 किलोमीटर की दूरी पर कांगड़ा शहर में स्थित है। यह शहर ऊपरी निकले डिवीजन में बंटा है। ऊपरी डिविजन को मैकलोडगंज और निचली डिवीजन धर्मशाला शहर है। जैसे ही हम धर्मशाला के लिए निकले तो सुबह का समय था। ठंडी ठंडी हवा, हल्की-हल्की ठंड में हमने चाय का आनंद लिया। चाय पीते पीते बसका इंतजार हो रहा था। किंतु पता चला कि बस का समय लेट हैं। चाय खत्म होते ही हम सभी पैदल ही निकल पडे। रास्ते में फोटोग्राफीसभी पैदल ही निकल पड़े। रास्ते में फोटोग्राफी की फोटोग्राफी करके फिर से हम आगे की ओर बड़े। बीच रास्ते में हमें टैक्सी मिली। जिसे हमने पैसों की बातचीत कर धर्मशाला की ओर निकल पड़े। टैक्सी में बैठे हमने हिंदी गानों का आनंद लिया। जैसे ही हम धर्मशाला के पास आते गए हमारा उत्साह उतना ही बढ़ता गया। धर्मशाला पहुंचते ही सबसे पहले हम स्टेडियम पहुंचे, किंतु हम सुबह समय से जल्दी निकल पड़े। लेकिन स्टेडियम की खुलने का समय सुबह 9:00 बजे का था। फिर आगे का दृश्य देखने के लिए हम सभी आगे बढ़े। वहां की सड़क बिल्कुल नीचे से ऊपर की ओर बढ़ रही थी। घर भी वहां से देखने में बहुत सुंदर प्रतीत हो रहे थे। जैसे ही हम धर्मशाला पहुंचे हमने वहां गाड़ी पार्किंग की और पूरी उत्साह के साथ वहां की सुंदरता देखने के लिए आगे बढ़ते रहे। धर्मशाला में हम सबसे पहले नीचे गए जहां छोटा सा फूल था जिसमें लोग बिना किसी भय से नहा रहे थे। वहां भी हम कुछ 20 से 25 मिनट रहे और वहां का दृश्य दिखा। उसके बाद हम ऊपर की ओर झरना देखने गए जो की एक से डेढ़ किलोमीटर ऊपर था किंतु वहां जाते समय सावधानी बहुत बरतनी पड़ती है। वह कहते हैं “ना नजर हटी तो दुर्घटना घटी। “जिस रास्ते ऊपर की ओर जा रहे थे वह रास्ता 4 से 5 फुट चौड़ा था। एक तरफ खाई थी लेकिन सुरक्षा के लिए खाई की तरफ लोहे की स्पोट्र्स लगी हुई थी। झरना इतने ऊंचे पर था कि चढ़ते चढ़ते सांस भी फूलने लग गई थी। आखिरकार चलते-चलते हम अपनी मंजिल पर पहुंच ही गए। वहां का दृश्य हम देखते ही रह गए। झरने का पानी इतना ठंडा क्यों उसका वर्णन मैं नहीं कर सकती। वहां पर भी हमने झरने के सामने फोटोग्राफी की। एक-एक दृश्य को हमने अपनी आंखों में समा लिया था। यहको हमने अपनी आंखों में समा लिया था। यह सब देखकर उसे समय यह लग रहा था की बस यही दुनिया है इससे हटकर कुछ भी नहीं है। वहां हम इतनी ऊंचाई पर थे कि वहां से हम पूरी खाई वह घर आराम से देख पा रहे थे। आते समय
हमें इतना समय नहीं लगा क्योंकि हम ऊंचाई से नीचे की ओर आ रहे थे। आते समय भी वाहन सावधानी का ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि आते वक्त ऊपर से नीचे की ओर पैर फिसल सकता है। बस अब हमारी यात्रा यही तकही थी। हम सभी ने झड़ने से आते वक्त बाजार से कुछ सामान खरीदा जिसमें सबसे ज्यादा सामान खादी का था जैसे कि कपड़े, बैग इत्यादि। जैसे हम सभी धीरे-धीरे वापस अपनी गाड़ी के पास आए तब हमें पता चला कि हमारे पास यानी मेरे और मेरे सहपाठी के पास अपना फोन ही नहीं है। इससे पहले हमें इस बात की भनक भी नहीं थी कि हमारे पास हमारा फोन नहीं है। हमें पता इसलिए नहीं लग पाया क्योंकि हमारे हाथ में फोटोग्राफी करने के लिए किसी और का फोन था। उसे समय माहौल खुशी से थोड़ा निराश हो चुका था। हम फिर से वापस फोन की तलाश में पीछे मुडे। धर्मशाला जाते ही जहां हम सबसे पहले यात्रा के दौरान घूमने गए थे, वहीं पर हम दोनों के फोन रखे हुए थे। इस दौरान हमें थोड़ी सी डेंट का भी सामना करना पड़ा। अगर गलती की थी तो डांट भी बनती थी। लेकिन एक बात थी जो हमें वहां देखने को मिली कि वहां के लोग इतने ईमानदार हैं कि उन्होंने वहां पर रख 2 घंटे फोन, को नहीं उठाया। फोन मिलते ही हम खुशी से उभर पड़े। फिर से हम गाड़ी में बैठ अपने घर की ओर
निकल पड़े।
गाड़ी से उतर हमने कांगड़ा की बस ली उसमेंના सामना करना पड़ा। अगर गलती की थी तो डांट भी बनती थी। लेकिन एक बात थी जो हमें वहां देखने को मिली कि वहां के लोग इतने ईमानदार हैं कि उन्होंने वहां पर रख 2 घंटे फोन, को नहीं उठाया। फोन मिलते ही हम खुशी से उभर पड़े। फिर से हम गाड़ी में बैठ अपने घर की ओर निकल पड़े।
गाड़ी से उतर हमने कांगड़ा की बस ली उसमें
हमने 3 घंटे का सफर किया। कांगड़ा पहुंचते
ही हमें आगे की बस अंब रेलवे स्टेशन की बस
मिली। हम रुकते ही हमने खाना खाया। खाना
खाते ही हम रेलवे स्टेशन पहुंचे। किंतु रेल को
आने में अभी 2 घंटे से 2:30 घंटे थे। रेलवे स्टेशन
पर हम थोड़ा पहले आराम किया और आगे के
सफर के लिए थोड़ा खाने पीने का सामान लिया।
ऐसे करते-करते रेल का समय 1:40 हो गए।
रेल आई हम सभी बैठे। थोड़ा सा एक-दो घंटे
सो गए। सफर बहुत लंबा था। लगभग 6 घंटे
का सफर हमने तय किया। जैसे ही हम कुरुक्षेत्र
रेलवे स्टेशन के पास आते गए हमने विष्णु
सहस्त्रनाम के बीच मंत्रो का उच्चारण किया साथ
में गीता के कुछ श्लोक का भी। आखिरकार चार
दिन की यात्रा हमारी समाप्त हुई। रेलवे स्टेशन से
हम सभी अपने-अपने घर की ओर निकल पड़े 15
Kavita devi
TOUR
बहुत सी कोशिश के बाद वो समय आ गया था जब श्री कृष्णा महोदय से हमे यात्रा की अनुमति मिल गई थी।
प्रयास पहले भी बहुत किये पर किसी ना किसी कारण वस हम विफल रहे। कभी छात्रो के घर से अनुमति नही मिली तो कभी विश्वविद्यालय से परंतु 02.04.2024 को कृष्णा महोदय ने आज्ञा दे दी और खुशी की बात यह थी कि सभी छात्रो के घर से भी अनुमति मिल चुकी थी वो दिन बहुत उत्तेजना से भरा था। TOUR की पैकिंग के लिए मन मे जो भाव थे वो कुछ अलग ही अनुभव था। 05.04.2024 की रात्रि को रेलवे स्टेशन कुरूक्षेत्र पर हम सभी 11:00 PM पर पहुंचे Train की Timing 02:00 AM का था। 11:00 PM से 02:00 AM का रेलवे स्टेशन का वो Time बहुत ज्यादा यादगार था। TOUR की Starting के पल बहुत अनुभवी थे वो 3 घण्टे कब गुजरे पता ही नही चला 02:00 AM पर ट्रेन में प्रवेश किया फिर कुरुक्षेत्र से हिमाचल के लिए हम निकले। ये रात्रि को ट्रेन का मेरा पहला सफर था।
सुबह 08:00 AM दिनांक 0604.2024 को हम हिमाचल पहुंचते ही जो सबसे खुबसुरत दरयिा था वो नागल डेम का था जो देखने की आकर्षक था पहाडो की
सुन्दरता वहा के घर खेत सब कुछ मेरे लिए बहुत अलग व आकर्षक थे 08:20
AM पर हमारा ट्रेन का सफर अम्ब आकर समाप्त हुआ स्टेशन से हम ऑटो से
बस स्टैण्ड के लिए निकले। सबसे अच्छी बात यह लगी मुझे कि वहा के लोगो
को व्यवहार बहुत अच्छा था। अम्ब से हमने बलाहार के लिए बस ली अनुरोध करके
हम बस के आगे वाली सीट पर बैठ गए क्योकि सफर 2 घण्टे का था और
हिमाचल की घूमावदार सडको की वजह से सर बहुत चक्कर गया था। थक्कान के
कारण ये दो घण्टे निंद मे गुजर गए और हम बहलाहर पहुंच गये। वह पर पहुंचने
पर सब कुछ गोल-गोल दिखाई दे रहा था। वहा से बलहार गेस्ट हाउस तक
पुरुषोतम महोदय के साथ का समय बहुत अच्छा था। 11:00 AM पर हम गेस्टपुरुषोतम महोदय के साथ का समय बहुत अच्छा था। 11:00 AM पर हम गेस्ट हाउस पहुंचते ही बैग रखते ही पुरुषोतम महोदय ने अपने घर चाय पर आमन्त्रन भेजा। फिर हम सभी वहा पहुंचे। उनके घर मे महोदय की माता जी बच्चो और महोदय जी की पत्नी से मिलकर बहुत अच्छा अनुभब हुआ। हिमाचल में घर के भाव मिले चाय के बाद फिर सभी गेस्ट हाउस पहुंचे। फिर सबने अपने-अपने टिफिन खोले खाना खाकर सभी बैठे ही थे कि पुरुषोतम सर सर कर बुलावा आ गया व्यास नदी के भ्रमण के लिए सभी के चहरे थक्कान से उतरे हुए थे। परंतु नदी के सौन्द्रय को देखकर सब अपनी थक्कान को भूल गए पहाड से आता हुआ स्वादिष्ट मिठा जल फिर नदी के रंगो से भरे पत्थर और फिर नदी में स्नान। सब कुछ नया व अनुभवी था। सब का तो नही पता पर मेरा ये पहली बार था। मुझे तो बहुत अच्छा लगा सबने बहुत मस्ती की फिर स्नान के बाद फोटो किया उसके बाउ सभी दोपहर के खाने के लिए गए। फिर सभी ने साथ बैठकर भोजन किया भोजन के पश्चात वापिस गेस्ट हाउस आ गये ।
उसके बाद स्नान कर सभी ने विश्राम किया उसके बाद सायकाल को सभी तैयार होकर शिव मन्दिर के लिए निकले जो 5 किलोमिटर दूर था। सभी ने कुछ दूरी तय की परंतु सूरज डूबने को था तो सभी ने रास्ते से वापिस लौटने को निर्णयन किया। रास्ते में हमे एक अंकल मिल बबलु अंकल जिन्होने हमे गेस्ट हाउस तक लिफट दी । और मजे की बात यह थी अंकल गेस्ट हाउस तक छोडने आए और उनको हम
फिर वापिस शिव मन्दिर ले गये। जो सबसे अच्छा समय था रात को पहाडो का सफर दर्शन बहुत अच्छे से हुए फिर सभी वापिस गेस्ट हाउस आ गये। अंकल को धन्यवाद बोला फिर सभी खाना खा कर सो गये। उसके बाद अगले दिन सुबह ज्वाला जी माता के दर्शन के लिए गये जोकि बहुत अच्छे से हो गये उसके बाद सभी ने दरबारा मे ही भोजन किया भोजन के बाद सभी बस से चामून्डा माता जी के दर्शन के लिए निकले रात्रि मे मन्दिर का दर्शय सौन्द्रय पूर्व था। दर्शन के बाद सभी पास होटल में रूके सुबह 04:00 AM बजे वहां से मन्डी के लिए निकले जिसके लिए हमने कैब बुक की Tour का सबसे सुन्दर स्थान मेरे लिए मन्डी का था। जो कि बहुत ही सुन्दर था मन्डी मे झरना स्टेडीयम वहा के पहाड लोग सब कुछ बहुत अच्छा था। उसके बाद हम बस से अम्ब पहुंचे। अम्ब से ट्रेन से रात्रि 09:00 PM बजे सभी कुरूक्षेत्र पहूचे फिर सभी अपने-अपने घर चले गये Tourकुछ बहुत अच्छा था। उसके बाद हम बस से अस्ब पहुंचे। अम्ब से ट्रेन से रात्रि 09:00 PM बजे सभी कुरुक्षेत्र पहूचे फिर सभी अपने-अपने घर चले गये Tour का ये सफर बहुत अच्छा था। सभी ने बहुत मस्ती की और इस प्रकार Tour की यात्रा समाप्त हुई
Name: Kavita
PGDKTSI
Sem: II
Class Roll No:7
मेरा नाम सरिता है, मैं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संस्कृत एंव प्राच्य विद्या संस्थान की विद्यार्थी हूँ। हमारा टूर 6 अप्रैल 2024 को ऊना( हिमाचल प्रदेश) के लिए गया।
हम 6 विद्यार्थी 1 शोध छात्रा और हमारे गुरु जी डॉ विनोद कुमार जी थे। इस टूर में मैंने अनेक परिस्थितियों का सामना किया। मैंने इस टूर का पूरा हिसाब रखा। जोकि मैं विस्तार से बताती हूँ।
कुरुक्षेत्र 3rd गेट:-
मैंने एक ओटो वाले अंकल से बात की रात के 11 बजे रेलवे स्टेशन तक छोड़ कर आने के लिए। लेकिन अंकल ने एक सवारी के 20 rs मागें ।
मैंने अंकल को बोला हम तो 100 rs देगें । तो अंकल ने हाँ कर दी ओर रात के 11 बजे हमे रलेवे स्टेशन पर छोड़ कर आए। हमने रेलवे स्टेशन पर बहुत चित्र लिए , बहुत मस्ती की।
सर ने कहा 500-500 rs सरिता के पास जमा करवा दों।
हम सबने 500-500rs इकठ्ठे किए। सब के पैसे मेरे पास थे। हम आठ लोग थे तो मेरे पास 4000rs इकठ्ठे हो गए। और मैंने उन पैसों में से टिकट ली , कुरुक्षेत्र से अम्ब अन्दौरा तक की टिकट ली। एक टिकट 95rs की थी । तो मैंने उनको 760rs दिए।
अम्ब अन्दौरा:-
हम हब सुबह के आठ बजे अम्ब पहुंच गये।
वहां रेलवे स्टेशन पर से ही बस स्टैंड जाने के लिए ओटो बुक किया। अंटी 20rs सवारी ले रही थी। वहां पर अंटी ओटो चला रही थी। हम सभी ओटो में बैठ गये। हम सभी बस स्टैंड पहुंच गये। अंटी ने कहा 160rs दे दो, मैंने बोला 150rs ले लो। अंटी ने 150rs ही ले लिये। हम बस स्टैंड से चम्बापतन के लिये बस में बैठ गए। परिचालक ने बोला एक सवारी के 60rs लगेंगे। मैंने उसको 480rs दे दिए। ओर आठ टिकट उससे मैंने ले ली।
हम थोड़ी देर बाद चम्बापतन पहुंच गए। हमें वहां पुरुषोतम् गुरु जी लेने के लिये आए। केंन्द्रिय संस्कृत विश्वविद्यालय (वेदव्यास परिसर बलाहर: ) में लेकर आए। ओर हमने वहां पर चित्र लिये, बहुत मस्ती की।
बलाहर: में हमने खाना खाया । एक प्लेट खाने की 60rs की थी, तो मैंने उनको 480rs दे दिये। खाने के बाद पुरुषोतम् गुरु जी ने हमें आईसक्रिम खिलाई। मैंने वहां पर भी चित्र लिये।
खाना खिलाने ओर आईसक्रिम खाने के बाद सर हमें व्यास नदी में लेकर गये। हम सब ने नदी में स्नान किया। बहुत मस्ती की, ओर बहुत सारे चित्र भी लिये।
हमनें व्यास नदी में स्नान करते हुए , बहुत मस्ती की।
व्यास नदी में स्नान करने के बाद हम गेस्ट हाऊस में चले गए।
हमनें इस गेस्ट हाऊस में विश्राम किया। हम शाम के 4 बजे कालशेवर मन्दिर में जाने के लिये तैयार हुए। हमें वहां तक जाने के लिये, गाड़ी नही मिल रही थी। हम सब पैदल चल पड़े। रास्ते में जाते हुए बहुत मस्ती की, शहतूत खाये, ओर चित्र भी लिये।
रास्ते में एक टेम्पो मिला । सर ने अंकल से बात की हमें कलशेवर मन्दिर ले चलो। अंकल ने आने जाने का किराया 600rs मांगा।
मैंने अंकल से बात की ,अंकल हम तो 400rs देगें। अंकल बोला ठीक हैं। हमने वहां पहुच कर 50rs का प्रसाद लिया। ओर हमने मन्दिर में अच्छे से दर्शन किये। हम शाम को बलाहर आ गए। ओर छात्रावास भोजनालय में खाना खाया। खाना खा कर हम वापिस गेस्ट हाऊस में आ गए। रात को इस गेस्ट हाऊस में विश्राम किया।
उस टेम्पो वाले अंकल का व्यवहार देखकर हमने अगले दिन के लिये भी अंकल की गाड़ी को बुक कर लिया था। बलाहर से ज्वाला जी के लिये। अंकल बोले 800rs किराया लगेगा। मैंने अंकल से बात की हम सिर्फ जाने का किराया देगें।आप 8000rs बहुत ज्यादा ले रहे हो। हम आपको 400rs ही देगें। अंकल मान जाते हैं। हम सुबह के आठ बजे बलाहर से ज्वाला जी जाने के लिये तैयार हो जाते हैं। सबुह हमने पुरुषोतम् गुरु जी के परिवार के साथ चित्र लिये।
हम सब वहां से चल पड़े। ओर टेम्पो में आकर बैठ गये। हमनें टेम्पो में बैठकर बहुत मस्ती की, बहुत सारे चित्र लिये, अनुपम ने विडियो बनाई।
रास्ते में हमने एक ढ़ाबे पर चाय पी, बिस्केट खाये। मैंने उनको 130rs दिये। हमने वहां से 20rs की पानी की बोतल , 70rs के केले लिये।
हम ज्वाला जी 10 बजे तक पहुंच गये थे। मैंने अंकल को 400rs किराया दिया। हम सभी दर्शन करने के लिये मन्दिर में चले गये। मैंने वहां 101rs का प्रसाद लिया।मैंने वहां प्रसाद लेकर भी चित्र करवाया।
हम सभी लाईन में खड़े हो गये, दर्शन करने के लिये। तो सभी को प्यास लग रही थी। मैंने 20rs की पानी की बोतल ली। ओर सबने पानी पिया। हम सभी ने ज्वाला माता जी के दर्शन किये।
मेरे पास उस समय 880rs बच गये थे। मैंने सभी को बोला 500rs-500rs ओर इकठ्ठे कर लेते हैं। सभी ने मुझे फिर से 500rs-500rs दिये। मेरे पास 4,880rs इकठ्ठे हो गये थे। हम सब ने वहां से समान खरीदा । मैंने भी लिया,
हम सभी दर्शन करने के बाद बस स्टैंड पर आ गये। वहां पर परिचालक ने कहा एक सवारी के 60rs लगेगें। हम सभी बस में बैठ गये। लेकिन थोड़ी दूर बस चलने के बाद परिचालक बोला 850rs दे दो। मैंने कहा हमें एक सवारी के 60rs कहे थे। तो उसके हिसाब से पैसे देगें। मैंने कहा आपने हमें झूठ बोल कर बस में क्यूँ बैठाया। मैंने परिचालक के साथ बहुत देर तक बहस की, मैंने उसको 750rs दिये। ओर उनसे आठ टिकट ले ली। हमने रास्ते में 90rs के जीरा कोल्ड ड्रिंक पी, 20rs की पानी की बोतल ली।
हम शाम तक चामुण्डा जी पहुंच गये। हमने वहां चाय पी। जिसके पैसे अनुपम ने दिये 200rs। वहां हमने बहुत मस्ती की, चित्र लिये, ओर चामुण्डा माता जी के दर्शन किये।
माता जी के दर्शन करने के बाद लगंर खाया। ओर उसके बाद रूम बुक किया। वो 600rs एक रूम के मागं रहे थे। मैंने उनसे भी बात की हम दो रूम बुक करेगें। आप 1000rs ले लेना। लेकिन वो नहीं माने। मैंने उनको 1200rs दिये। 200rs कुसुम ने दिये।
हम सबुह पाँच बजे रूम में से तैयार होकर धर्मशाला(हिमाचल प्रदेश) जाने के लिये निकल पड़े। सुबह भी हमने चित्र लिये।
हम सभी ने सुबह चाय पी, बिस्केट खाये। ओर चाय पीते समय चित्र भी लिये।
चाय के पैसे अनुपम ने दिये 200rs। हम सभी चाय पी कर बस स्टैंड पर गये। लेकिन सुबह के समय वहां कोई भी बस नहीं थी। हम सभी पैदल चल पड़े। रास्ते में जाते समय हमने बहुत मस्ती की, बहुत सारे चित्र लिये।
हमने ओर भी बहुत सारे चित्र लिये। हम पैदल चल रहे थे। तो हमें रास्ते में एक गाड़ी मिल जाती हैं। हमने उस गाड़ी को बुक किया। गाड़ी वाला अंकल 2000rs किराया मागं रहा था। मैंने अंकल को बोला की हम 1500rs देगें । तो वो 1500rs में मान जाता हैं। हम सभी गाड़ी में बैठ जाते हैं। ओर थोड़ी देर बाद हम धर्मशाला पहुंच गये। हमने वहां धर्मशाला में मैक्लोडगंज झरना देखा। बहुत मस्ती की, बहुत सारे चित्र लिये।
हम सभी ने बहुत मस्ती की। ओर हम वापिस गाड़ी तक आते आते भी बहुत मस्ती की,चित्र लिये
।
गाड़ी वाला अंकल हमें धर्मशाला बस स्टैंड तक छोड़ कर गये। मैंने अंकल को 1500rs गाड़ी का किराया दिया। ओर हम वहां से कांगडा के लिए बस में बैठ गए। परिचालक बोला 350rs लगेंगे। मैंने बोला भाई किराया कुछ ज्यादा नही है मैंने परिचालक को 250rs दिये। ओर उन्होंने मुझे आठ टिकट दे दी। हम थोड़ी देर बाद कांगडा बस स्टैंड पर पहुंच गए। हमने कांगडा बस स्टैंड से अम्ब अन्दौरा के लिए बस में बैठ गये। कुसुम बस स्टैंड वाली दुकान से हम सब के लिये फ्रूट लेकर आई 390rs के। वह बस हरियाणा की थी, जो चण्डीगड जा रही थी। उस बस के परिचालक से सर ने किराया पूछा। तो अंकल बोले एक सवारी का 220rs लगेगा। हरियाणा की बस देखकर मेरी एक सहेली ने पूछा अंकल आप कहा से हो। अंकल बोले में खानपुर (रोहतक) से हूँ। मैंने कहा अंकल मेरी माँ भी आपके गाँव की हैं। मैंने उस अंकल को अपने नाना जी का नाम बताया वो पहचान गये। अंकल ने मेरे से किराया 1100rs लिया । 600rs कम किये किराये में से । 1000rs विनोद सर ने दिये, ओर 100rs मैंने, क्योंकि मेंरे पास पैसे कम बचे हुए थे। हम सभी तीन घंटे के बाद अम्ब पहुंच गए। हमने अम्ब बस स्टैंड के पास एक ढ़ाबे पर खाना खाया। जिसके पैसे भी 400rs सर ने ही दिये। हम सभी एक गाड़ी बुक करके रेलवे स्टेशन तक आये। अंकल बोले 160rs किराया दे दो। मैंने अंकल को कहा हमने आते समय 150rs दिया था। आप भी 150rs ही ले लो। अंकल ने 150rs ही लिये। हमने थोड़ी देर तक रेल का इतंजार किया। और कुछ देर बाद रेल आ गई , हम सब बहुत खुश हो रहे थे । मैंने रेलवे स्टेश से सबके लिये , जीरा कोल्ड ड्रिंक ली 145rs के । सर ने सबके लिए टिकट पहले से ही बुक कर रखी थी। 185rs एक टिकट का था। हम सब बहुत मस्ती कर रहे थे। मैंने सबका हिसाब किया। जिसके जितने ज्यादा पैसे लगे थे। मैंने प्रसाद भी आठ हिस्सों में बाँटा। और हमने रेल में भी
चित्र लिये।
हम सभी बहुत मस्ती करते हुए आये। हमारा टूर बहुत ही अच्छा रहा। और सर ने मुझे पैसो वाली जिम्मेदारी सौप रखी थी। मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला हैं। हम सभी 7:30pm पर कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन पर पहुंच गये थे।
सरिता
गाँव अदियाना , जिला पानीपत ।
मेरा अनुभव
Anjali
मेरा नाम अंजली है मैं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के “संस्कृत एवं प्राच्य विद्या संस्थान कि विद्यार्थी है। हमारा Tour अप्रैल 2024 को ऊना हिमान्चल प्रदेश 1 के लिए हम 6 विद्यार्थियों। शोध विद्यार्थी और हमारे गुरु श्री विनोद शर्मा जी के साथ रवाना हुआ। इस Tour में मैने अनक परिस्थितियों का सामना किया।
उन्हें मै विस्तार से बताती हूँ :-
कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन : –
हम सभी छात्र और मास्टर जी अपने अपने स्थान से सिविल हस्पताल पर एक साथ इकट्ठा हो कर रेलवे स्टेशन पहुंचे। अब पहुंच तो गए परंतु हमारी रेलको आने में अभी समय था। तब हमने रिलवे स्टेशन के विश्राम गृह हमें अपना अपना सामान एक जगह रखकर थोड़ा हंसी मजाक, कुछ तस्वीरें लीं। कुछ साथियों ने अपने अपने थैल से खाने का सामान निकाला। मैंने भी अपने थैले से मेरे द्वारा तैयार किया गया पोहा निकाला। हम सभी ने मजे लेते हुए आराम से खाया परंतु हमारे गुरु जी ने नहीं खाया क्योंकि वह रात्रि के भोजन के पश्चात् पुनः भोजन नहीं करते सभी खा-पीकर बैठ गए परंतु अभी भी रेल के आने में समय था। तो मुझे और मेरे 3 साथियों को चाय पीने की तलब हुई। क्योंकि हम सभी रेलवे स्टेशन बैठ कर यह अनुभव करना चाहते थे कि मध्य रात्रि के समय, रेलवे स्टेशन पर बैठ कर चाय पीने का अनुभव कैसा पूर बैठ कर चाय होता है?
चाय में भंग :-
चाय में भंग ऐसे हुआ कि जब हम स्टेशन से बाहर चाय लेने जा रहे थे तो हमने देखा कि सरकारी पुलिस कर्मी स्टेशन पर जमीन पर सोने वालों को अपनी लाठी से मारकर उठा रहा इसी बीच उनमें से आदमी ने पुलिस वाले से बहस कर ली। यह पुलिस वाले से बरदाश्त नहीं हुआऔर उसने उस गरीब आदमी पर अपनी लाठीयों बरसानी शुरुकुर दी यह देखकर मैं सहम गई और मेरा मन वापिस अपने साथियों के पास जाने को हुआ परंतु मेरे दोस्त अनुपम ने समझाया कि ऐसे सफ़र में हादसे होते रहते हैं ये बात को समझकर हम आगे चाय कि दुकान कि ओर चल दिए और वहाँ से चाय पैक करवाई और अपने साथियों के साथ बैठकर चाय का आनंद लिया ।
रेलगाड़ी का सफर : –
हम सभी अपने रेलगाड़ी के डब्बे में बैठ गए। शुरुआत में तो हमें सीट नहीं मिली परंतु कुछ एक डेढ़ घण्टे के बाद से सीट मिल गई और एक सरदार बाबा फकीर ने, आधे से ज्यादा रास्ते तक तो अपने ऊंची-ऊंची आवाज़ से बोल-बोलकर सभी को परेशान कर दिया। कुछ चार-पाँच घंटे के पश्चात हमने अपनी खिड़की से सूर्योदय होते देखा जो पहाड़ों के बीच, से बहुत ही खूबसूरत नज़र आ रहा था। उसके बाद हमने “भव्य नंगल डैम “देखा जो अत्यन्त खूबसूरत था और उसके कुछ समय के पश्चात हम अपने स्टेशन “अम्ब. अन्दौरा “उतर गए ।
अम्ब अन्दौरा से बलाहर तक का सफर :-स्टेशन से उतर कर हम सभी ने ऑटो लिया जिसकी चालक एक महिला थी जो पहाड़ी मेहनती और खूबसूरत महिला थी उसने हमे बस स्टैंड पर थोड़ा। बस स्टैंड से हमने बस ली काँगड़ा कि और हम “चम्बापतन ” उतरे । उतरते ही हमने, खूबसूरत दृश्य देखा पहाड़ो के बीच में पत्थरों के उपर से ठंडी-ठंडी हवा को मैहसूस किया और आँखों के सामने व्यास नदी देखी और उस नही के किनारे चलेते हुए हमें हमारी संस्कृत विश्वविद्यालयः वेदव्यासपरिसर बलाहर” के अतिथी गृह में पहुंचे ।
“केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय वेदव्यास– परिसर बलाहर का” अत्यन्त सुखद अनुभव–
परिसर में पहुंचने के बाद हमने अपना नाश्ता किया और उसके तुरंत बाद हमें हमारे परिसर वाले गुरु जी ‘पुरुषोत्तम महोदय’ का अपने आवास में चाय पर बुलावा आया और हम उनके घर गए चाय पी और उसके बाद पुरुषोतम गुरु जी हम सभी को व्यास नदी घुमाने ले गए। नदी के किनारे हमने पहाड़ी के बीच से निकलता हुआ शुद्ध शीतल जल पीया और हम ने नदी के किनारे सुंदर पत्थर देखें उसके बाद हमने व्यास में खूब नहाए धोए मजे से नदी के पानी में डुबकियां लगाई और नदी से नहा कर हम खेतों के बीच से निकलते हुए शहतूत खाई। उसके बाद हमने छोटी सी भोजनालय में भोजन किया और भोजन करके हम सभी ने अपने परिसर का भ्रमण किया जो कि बहुत खूबसूरत था। परिसर में हमने दोनों मन्दिरों के दर्शन किए। और पूरा परिसर का दौरा किया। उसके बाद हम शाम में ” ऐतिहासिक प्राचीन मन्दिर श्री कालीनाथ कालेश्वर महादेव मन्दिर ” के दर्शन को गए। दर्शन करके हम पुनः परिसर में आ गए और वहाँ हमने रात्रि का भोजन किया और खाने के पश्चात एक चक्कर मैदान का लगा कर विश्राम किया।
परिसर से ज्वालामुखी –
सुबह जल्दी उठकर नहा धोकर तैयार होकर हम परिसर से ज्वालादेवी मन्दिर के लिए टैम्पू में निकले रास्ते में हमने चाय नाश्ता किया और परिसर से 13 km दूर ज्वालादेवी मन्दिर पहुंचे।
वहाँ हमने एक दुकान से प्रसाद लेकर अपना सामान दुकान पर रखकर मन्दिर में लाइन में लग गए। करीब 4-5 घण्टे के बाद हमें माता ज्वालाजी दर्शन हुए । दर्शन करते ही मानो आत्मा त्रीप्त हो गई सारे सफर की थकान गायब हो गई हो। दर्शन के पश्चात् हमने ज्वाला जी का लंगर किया जो बहुत स्वादिष्ट था। और मंदिर से निकाल कर कुछ छोटी मोटी खरीदारी कर हम बस स्टैण्ड पहुंचे।
Muniya devi
1. शैक्षिक पर्यटन का सूक्ष्म परिचय
2. प्रस्तावना
3. शैक्षिक भ्रमण के उद्देश्य
4. शैक्षिक भ्रमण का महत्व
5. शैक्षिक भ्रमण का विवरण:-1) बलहार – हिमाचल प्रदेश
2) महाकालेश्वर मंदिर बरौली (हिमाचल प्रदेश)
3) ज्वाला माता मंदिर (हिमाचल प्रदेश)
4) चामुंडा देवी मंदिर (हिमाचल प्रदेश)
5) धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश)
8:47 pm✓✓
1
शैक्षिक पर्यटन
शैक्षिक पर्यटन का दिन :- शुक्रवार
शैक्षिक पर्यटन का दिनांक :- 5/04/2024
शैक्षिक पर्यटन का माहः- अप्रैल
शैक्षिक पर्यटन का चयनित स्थल :-1) बलाहर 2) महाकालेश्वर मंदिर बरौली
3) ज्वाला माता मंदिर
4) चामुंडा मंदिर
5) धर्मशाला
यात्रा आरंभ करने का स्थलः-कुरुक्षेत्र
विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र
यात्रा प्रारंभ करने का समय: रात्रि 1:30
शैक्षिक पर्यटन का साधन :- रेल द्वारा
पर्यटन में सम्मिलित छात्र व छात्राओं की संख्याः-छात्र :- १ छात्राएं:-६
शैक्षिक पर्यटन में सम्मिलित शिक्षित व शिक्षिकाएं :- शिक्षक :- १ शिक्षिकाए:- ०
शैक्षिक पर्यटन की समाप्ति तिथि:- 9/04/2024
प्रस्तावना
पर्यटन जीवन का प्रमुख अंग है। वर्तमान समय में शैक्षिक भ्रमण का शिक्षा के क्षेत्र में विशेष महत्व है। छात्र किसी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक अथवा धार्मिक स्थल का अवलोकन कर अपने ज्ञान का संवर्धन कर पाते हैं।
वर्तमान समय में शैक्षिक भ्रमण छात्रों को प्रत्यक्ष ज्ञान प्रदान करने में एक मात्र उपयोगी साधन है। परंतु किसी शैक्षिक भ्रमण उपाधदियता समुचित क्रियान्वयन पर निर्भर हैं। इस प्रकार प्रत्येक विषय की शिक्षा में शैक्षिक भ्रमण का स्थान और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। क्योंकि यह विज्ञान और विषय का समन्वित अध्ययन है। इसके द्वाराशिक्षा का नीरज वातावरण समाप्त हो जाता है। और छात्रों में रोचकता आती है। इस प्रकार / दृष्टि से पर्यटन की भूमिका मानव के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। 3
9:11 pmv.
शैक्षिक भ्रमण के उद्देश्य
शैक्षिक भ्रमण के निम्नलिखित उद्देश्य हैं:-
1) छात्रों में उत्तरदायित्व समझने एवं निरीक्षण करने की दशा का विकास करना।
2) शैक्षिक भ्रमण छात्रों को विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक धार्मिक महत्व तथा घटनाओं के बारे में जानकारी होना।
3) छात्रों में विभिन्न विषयों के प्रति रुचि विकसित करना।
4) सैद्धांतिक ज्ञान का संबंध व्यवहारिक ज्ञान से जोड़ना।
5) छात्रों में स्वयं अवलोकन एवं निरीक्षण करने की दशा का विकास करना।
6) प्राकृतिक वातावरण में अपनाएं गए नियमों को देखकर निष्कर्ष पर पहुंचना। 0.15
शैक्षिक भ्रमण का महत्व
भ्रमण द्वारा इतनी अधिक शैक्षिक लाभ होते हैं कि सभी का आसानी से वर्णन नहीं किया जा सकता। अंग्रेजी के प्रसिद्ध लेखक बेकन का कहना है कि “युवा के लिए भ्रमण शिक्षा का अंग है जबकि बड़े लोगों को इससे अनुभव मिलता है।”
शैक्षिक भ्रमण के महत्व के कुछ प्रमुख बिंदु का वर्णन निम्नलिखित है:-1) ज्ञान में वृद्धि भ्रमण हमारे किताबी ज्ञान में वृद्धि करता है। भ्रमण के सहारे इतिहास हमें वास्तविक दिखता है, तथा समूचा भूगोल सरकार हो उठता है। समाजशास्त्र की नींव मजबूत हो जाती है। ऐतिहासिक महत्व के स्थान के भ्रमण से पुस्तकों में पड़ी धुंधली छवि प्रकाशित होकर साकार हो जाती है।
2) संसार के व्यावहारिक ज्ञान की प्राप्ति : – भ्रमण संसार के व्यावहारिक ज्ञान को प्राप्त करने का सुनहरा अवसर प्रदान करती है। प्रसिद्ध कवि पोप ने ठीक ही कहा है कि “मानवता का सही अध्ययन मनुष्यों के अध्ययन से ही हो सकता है ब्राह्मण के दौरान तरह-तरह के व्यक्तियों से हमारा संपर्क होता है।”
3) स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य:- मस्तिष्क के स्वस्थ विकास के लिए भी भ्रमण अति आवश्यक है। रविंद्र नाथ टैगोर का कहना है की मन का स्वास्थ्य चुनी हुई पुस्तकों की जेल की दीवारों से
स्वास्थ्य चुनी हुई पुस्तकों की जेल की दीवारों से घिरे निश्चल स्कूल की गतिहीन कक्षाओं में पढ़ाई से नहीं सुधर सकता।
4) दृष्टिकोण विस्तृत होता है:-भ्रमण से हमारा दृष्टिकोण विस्तृत होता है। इससे हमारे विचारों और दृष्टिकोण में उदारता आती है। इसके द्वारा हमारे मन में मानवता के प्रति सहानुभूति जागृत होती है। विविध प्रकार के अनुभव पाकर हम घटनाओं और वस्तुओं को एक नई दिशा से देखना सीख जाते हैं, इससे मूल्य के प्रति हमारा शाहिद दृष्टिकोण विकसित होता है। 9:30 pm✓✓✓ 6
शैक्षिक भ्रमण का विवरण
हमारी यात्रा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के थर्ड गेट से प्रारंभ होती है। ऑटो की इस यात्रा के द्वारा हम कुरुक्षेत्र जंक्शन रेलवे स्टेशन पर उतारे गए। वहां से हमने अंब की टिकट ली। रेल का समय रात 1:30 बजे था जिसके दौरान हमने वहां मनोरंजन किया साथ में चाय का आनंद लिया। देखते ही देखते रेल का समय हो गया और हमने अपनी यात्रा को प्रारंभ किया। हम सभी हिमाचल प्रदेश सुबह 8:00 बजे पहुंचे गए जिसका विवरण इस प्रकार से है :—–
बलाहार हिमाचल प्रदेश
कहीं घंटे के सफर के बाद हम सभी सुबह 8:15 बजे वाला हर हिमाचल प्रदेश पहुंचे। बलहर पहुंचते ही हमने थोड़ा आराम किया। वहां पर हमारे गुरु जी के दोस्त रहते हैं, जो की कुरुक्षेत्र से ही रहने वाले हैं, उन्होंने हम सभी को चाय पर आमंत्रित किया। आराम करने के बाद हम सभी चाय पर उनके घर गए। चाय पीते पीते सर ने हमें वहां की यानी हिमाचल प्रदेश के बारे में बताया। चाय खत्म होते ही सर हमें वहां का प्राकृतिक माहौल दिखाने ले गए। वहां हमने पहाड़ों से आते पानी को भी पिया। यहां के पानी और वहां के पानी में बहुत अंतर था। पानी पीने में बहुत ही शीतल शुद्ध था, जिसे वहां के लोग पीने और घर का काम करने के लिए प्रयोग करते हैं। गुरुजी के दोस्त पुरुषोत्तम जी ने हमें वहां के व्यास नदी दिखाई, जिसमें हमने स्नान भी किया इसके दौरान पानी में तैरने की विधि भी बताई। उसे नदी में और उसके आसपास बहुत ही सुंदर पत्थर भी थे इसके रंग अलग-अलग थे। सभी विद्यार्थी वहां से सुंदर-सुंदर पत्थर भी लेकर आए हैं। हिमाचल प्रदेश में खास बात हमें यह देखने को मिली कि वहां पर जगह-जगह पर शहतूत के वृक्ष थे। जिससे हमने फलों का आनंद लिया। फिर हमने वहां दोपहर का खाना खाया और पुरुषोत्तम गुरु जी ने मीठे में कुल्फी खिलाई। उसके बाद हम सभी अपने अतिथि गृह आते-आते केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालयः वेद व्यासपरिसरः बलाहरः का भ्रमण करते हुए आए। केंद्रीय विश्वविद्यालय में भी बहुत सुंदर-सुंदर वृक्ष थे वहां का प्राकृतिक दृश्य हम देखते ही रह गए। पुरुषोत्तम गुरु जी ने हमें विश्वविद्यालय के सही स्थान के बारे में विस्तार से बताया। और वहां पर छात्र-छात्राओं के पढ़ने की शुल्क भी बहुत कम है। और छात्रों को छात्रवृत्ति भी दी जाती है।
विश्वविद्यालय का परा भ्रमण करके हम अपने
विश्वविद्यालय का पूरा भ्रमण करके हम अपने अतिथिगृह आए। फिर हमने वहां आराम किया, नहा धोकर फिर से हम शाम 5:00 बजे घूमने निकल गए।
9:42 pm
महाकालेश्वर मंदिर बरौली (हिमाचल प्रदेश)
महाकालेश्वर मंदिर घूमने तो हम सभी निकल पड़े लेकिन हमारे पास मंदिर जाने के लिए कोई भी साथ नहीं था। साधन के लिए हमने बात भी की किंतु वह मंदिर जाने के लिए काफी पैसे मांग रहे थे। लेकिन हमारे पास इतना बजट नहीं था तो हम पैदल ही वहां की प्राकृतिक सुंदरता देखने काफी दूर निकल गए। मंदिर बलाहर से 5 किलोमीटर दूर था। पैदल यात्रा करते हुए डेढ़ किलोमीटर दूर पहुंच गए। चलते-चलते हमें वहां एक वाहन मिला जो कि ऊपर से खुला था जिससे हवा आर पार हो रही थी। उस वाहन वाले से हमने बात की और वह कम पैसों से हमें मांकलेश्वर मंदिर ले जाने के लिए तैयार हो गए। तब हमें वहां ऐसा महसूस हुआ कि हमें साक्षात महादेव अपने दर्शन के लिए बुला रही हों। फिर हमने महादेव के दर्शन किए और आते समय बाजार का दृश्य देखा। उसके बाद हमने रात्रि का भोजन किया और अपने अतिथि गृह में जाकर सो गए। सुबह हम सभी जल्दी उठकर तैयार हो गए। हमने अगले स्थान का भ्रमण करने के लिए इस बहन वाले को बुला रखा था। हम सभी में पुरुषोत्तम गुरु जी को और उनके परिवार को फिर मिलेंगे कह कर आज्ञा ली।
ज्वाला माता मंदिर (हिमाचल प्रदेश)महाकालेश्वर मंदिर के बाद दूसरे स्थल घूमने आए जिसका नाम ज्वाला माता मंदिर था। वहां पहुंचकर कर पहले हमने अपना सारा सामान एक दुकान में रखा और वहीं पर हमने माता के सामान की टोकरी ली। माता काफी ऊंचे पर बैठी हुई है जो अपने भक्तों को अपने पास बुलाती रहती है। ऊपर चढ़ते चढ़ते हमें सांस चढ़ गई वहां पहुंचते ही हम लाइन में लगे हम सभी लाइन में लगभग 4:30 घंटे लग रहे हैं। लेकिन समय का बिल्कुल भी पता नहीं लगा क्योंकि वक्त माता की जयकारे लगाते रहेंगे जिससे बहुत चहल पहल थी और मनोरंजन था। वही माता के मंदिर में तीन-चार स्थल थे जिसमें जाकर के हमने दर्शन किए। वहां पर भक्तों के लिए सुरक्षाकर्मी भी थे। जिससे यात्रियों को किसी भी और असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके दौरान हमने ‘लंगर’ खाया जो की बहुत ही स्वादिष्ट था। हम सभी ने लंगर पेट पर खाया जिसे संतुष्ट हो गए। ज्वाला माता मंदिर से लौटे वक्त हमने अपने परिवार के लिए कुछ सामान खरीदा। उसके बाद हम बस स्टैंड से कांगड़ा की बस में चामुंडा देवी मंदिर गए तब समय शाम के 5:30 बज चुके थे। वहां पर भी हमारे गुरु जी के दोस्त मिले जिन्होंने हमारा सम्मान एक जगह रखवाया फिर उन्होंने हमें वहां के सभी जगह के बारे में बताया और भ्रमण करवाया। वहां पहुंचते ही हमने चामुंडा देवी के दर्शन किए साथ में वहां महादेव का भी स्थल था हमने वहां भी जाकर दर्शन किए। उसे जगह पर भी वहां ऐसे ऐसे स्थल थे जिसे देखकर हम आश्चर्यचकित रह गए। हमने ऐसा प्राकृतिक दृश्य आज तक नहीं देखा था। तब तक रात का समय हो गया था जिससे वहां का दृश्य और भी आकर्षित लग रहा था। चामुंडा देवी के मंदिर हम जब पहुंचे तब वहां आरती का समय हो गया था।
वहां की आरती देखकर मन बहत प्रसन्न हआवहां की आरती देखकर मन बहुत प्रसन्न हुआ क्योंकि आरती पूरे ढोल धमाकों के साथ हो रही थी। आरती के लिए वहां लोग बहुत भारी संख्या में पहुंचे हुए थे उसके बाद दर्शन करके हमने फोटोग्राफी की। ताकि हम बाद में उन फोटोस को भविष्य के लिए सहेज कर रख सके। उसके बाद हमने वही पर लंगर हॉल में रात्रि का भोजन किया। रात्रि बिताने के लिए हमने वहां पर रहने के लिए होटल देखें। थोड़ी सी मेहनत करने के पश्चात आखिरकार हमें रहने के लिए कमरे मिल गए। होटल में काम करने वाले सेवकों ने हमारे हरियाणा राज्य की तारीफ भी की। हरियाणा राज्य के साथ-साथ वहां के वासी यानी कि हमारी भी तारीफ की, क्योंकि हम उनके साथ बहुत ज्यादा घुल मिल गए थे और थोड़ा बहुत मजाक भी हुआ। वहां रात ठहर कर सुबह जल्दी 5:00 बजे तैयार होकर धर्मशाला के लिए निकल पड़े।
11:06 am✓✓✓
धरमशाला मैक्लोडगंज (हिमाचल प्रदेश)
मैक्लोडगंज, भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य के कांगड़ा जिले में स्थित धर्मशाला नगर का एक उपनगर है। धर्मशाला हिमाचल प्रदेश राज्य के कांगड़ा जिले में स्थित एक प्रमुख पर्यटन और दार्शनिय स्थल है। धर्मशाला कांगड़ा से 8 किलोमीटर की दूरी पर कांगड़ा शहर में स्थित है। यह शहर ऊपरी निकले डिवीजन में बंटा है। ऊपरी डिविजन को मैकलोडगंज और निचली डिवीजन धर्मशाला शहर है। जैसे ही हम धर्मशाला के लिए निकले तो सुबह का समय था। ठंडी ठंडी हवा, हल्की-हल्की ठंड में हमने चाय का आनंद लिया। चाय पीते पीते बसका इंतजार हो रहा था। किंतु पता चला कि बस का समय लेट हैं। चाय खत्म होते ही हम सभी पैदल ही निकल पडे। रास्ते में फोटोग्राफीसभी पैदल ही निकल पड़े। रास्ते में फोटोग्राफी की फोटोग्राफी करके फिर से हम आगे की ओर बड़े। बीच रास्ते में हमें टैक्सी मिली। जिसे हमने पैसों की बातचीत कर धर्मशाला की ओर निकल पड़े। टैक्सी में बैठे हमने हिंदी गानों का आनंद लिया। जैसे ही हम धर्मशाला के पास आते गए हमारा उत्साह उतना ही बढ़ता गया। धर्मशाला पहुंचते ही सबसे पहले हम स्टेडियम पहुंचे, किंतु हम सुबह समय से जल्दी निकल पड़े। लेकिन स्टेडियम की खुलने का समय सुबह 9:00 बजे का था। फिर आगे का दृश्य देखने के लिए हम सभी आगे बढ़े। वहां की सड़क बिल्कुल नीचे से ऊपर की ओर बढ़ रही थी। घर भी वहां से देखने में बहुत सुंदर प्रतीत हो रहे थे। जैसे ही हम धर्मशाला पहुंचे हमने वहां गाड़ी पार्किंग की और पूरी उत्साह के साथ वहां की सुंदरता देखने के लिए आगे बढ़ते रहे। धर्मशाला में हम सबसे पहले नीचे गए जहां छोटा सा फूल था जिसमें लोग बिना किसी भय से नहा रहे थे। वहां भी हम कुछ 20 से 25 मिनट रहे और वहां का दृश्य दिखा। उसके बाद हम ऊपर की ओर झरना देखने गए जो की एक से डेढ़ किलोमीटर ऊपर था किंतु वहां जाते समय सावधानी बहुत बरतनी पड़ती है। वह कहते हैं “ना नजर हटी तो दुर्घटना घटी। “जिस रास्ते ऊपर की ओर जा रहे थे वह रास्ता 4 से 5 फुट चौड़ा था। एक तरफ खाई थी लेकिन सुरक्षा के लिए खाई की तरफ लोहे की स्पोट्र्स लगी हुई थी। झरना इतने ऊंचे पर था कि चढ़ते चढ़ते सांस भी फूलने लग गई थी। आखिरकार चलते-चलते हम अपनी मंजिल पर पहुंच ही गए। वहां का दृश्य हम देखते ही रह गए। झरने का पानी इतना ठंडा क्यों उसका वर्णन मैं नहीं कर सकती। वहां पर भी हमने झरने के सामने फोटोग्राफी की। एक-एक दृश्य को हमने अपनी आंखों में समा लिया था। यहको हमने अपनी आंखों में समा लिया था। यह सब देखकर उसे समय यह लग रहा था की बस यही दुनिया है इससे हटकर कुछ भी नहीं है। वहां हम इतनी ऊंचाई पर थे कि वहां से हम पूरी खाई वह घर आराम से देख पा रहे थे। आते समय
हमें इतना समय नहीं लगा क्योंकि हम ऊंचाई से नीचे की ओर आ रहे थे। आते समय भी वाहन सावधानी का ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि आते वक्त ऊपर से नीचे की ओर पैर फिसल सकता है। बस अब हमारी यात्रा यही तकही थी। हम सभी ने झड़ने से आते वक्त बाजार से कुछ सामान खरीदा जिसमें सबसे ज्यादा सामान खादी का था जैसे कि कपड़े, बैग इत्यादि। जैसे हम सभी धीरे-धीरे वापस अपनी गाड़ी के पास आए तब हमें पता चला कि हमारे पास यानी मेरे और मेरे सहपाठी के पास अपना फोन ही नहीं है। इससे पहले हमें इस बात की भनक भी नहीं थी कि हमारे पास हमारा फोन नहीं है। हमें पता इसलिए नहीं लग पाया क्योंकि हमारे हाथ में फोटोग्राफी करने के लिए किसी और का फोन था। उसे समय माहौल खुशी से थोड़ा निराश हो चुका था। हम फिर से वापस फोन की तलाश में पीछे मुडे। धर्मशाला जाते ही जहां हम सबसे पहले यात्रा के दौरान घूमने गए थे, वहीं पर हम दोनों के फोन रखे हुए थे। इस दौरान हमें थोड़ी सी डेंट का भी सामना करना पड़ा। अगर गलती की थी तो डांट भी बनती थी। लेकिन एक बात थी जो हमें वहां देखने को मिली कि वहां के लोग इतने ईमानदार हैं कि उन्होंने वहां पर रख 2 घंटे फोन, को नहीं उठाया। फोन मिलते ही हम खुशी से उभर पड़े। फिर से हम गाड़ी में बैठ अपने घर की ओर
निकल पड़े।
गाड़ी से उतर हमने कांगड़ा की बस ली उसमेंના सामना करना पड़ा। अगर गलती की थी तो डांट भी बनती थी। लेकिन एक बात थी जो हमें वहां देखने को मिली कि वहां के लोग इतने ईमानदार हैं कि उन्होंने वहां पर रख 2 घंटे फोन, को नहीं उठाया। फोन मिलते ही हम खुशी से उभर पड़े। फिर से हम गाड़ी में बैठ अपने घर की ओर निकल पड़े।
गाड़ी से उतर हमने कांगड़ा की बस ली उसमें
हमने 3 घंटे का सफर किया। कांगड़ा पहुंचते
ही हमें आगे की बस अंब रेलवे स्टेशन की बस
मिली। हम रुकते ही हमने खाना खाया। खाना
खाते ही हम रेलवे स्टेशन पहुंचे। किंतु रेल को
आने में अभी 2 घंटे से 2:30 घंटे थे। रेलवे स्टेशन
पर हम थोड़ा पहले आराम किया और आगे के
सफर के लिए थोड़ा खाने पीने का सामान लिया।
ऐसे करते-करते रेल का समय 1:40 हो गए।
रेल आई हम सभी बैठे। थोड़ा सा एक-दो घंटे
सो गए। सफर बहुत लंबा था। लगभग 6 घंटे
का सफर हमने तय किया। जैसे ही हम कुरुक्षेत्र
रेलवे स्टेशन के पास आते गए हमने विष्णु
सहस्त्रनाम के बीच मंत्रो का उच्चारण किया साथ
में गीता के कुछ श्लोक का भी। आखिरकार चार
दिन की यात्रा हमारी समाप्त हुई। रेलवे स्टेशन से
हम सभी अपने-अपने घर की ओर निकल पड़े 15
Kavita devi
TOUR
बहुत सी कोशिश के बाद वो समय आ गया था जब श्री कृष्णा महोदय से हमे यात्रा की अनुमति मिल गई थी।
प्रयास पहले भी बहुत किये पर किसी ना किसी कारण वस हम विफल रहे। कभी छात्रो के घर से अनुमति नही मिली तो कभी विश्वविद्यालय से परंतु 02.04.2024 को कृष्णा महोदय ने आज्ञा दे दी और खुशी की बात यह थी कि सभी छात्रो के घर से भी अनुमति मिल चुकी थी वो दिन बहुत उत्तेजना से भरा था। TOUR की पैकिंग के लिए मन मे जो भाव थे वो कुछ अलग ही अनुभव था। 05.04.2024 की रात्रि को रेलवे स्टेशन कुरूक्षेत्र पर हम सभी 11:00 PM पर पहुंचे Train की Timing 02:00 AM का था। 11:00 PM से 02:00 AM का रेलवे स्टेशन का वो Time बहुत ज्यादा यादगार था। TOUR की Starting के पल बहुत अनुभवी थे वो 3 घण्टे कब गुजरे पता ही नही चला 02:00 AM पर ट्रेन में प्रवेश किया फिर कुरुक्षेत्र से हिमाचल के लिए हम निकले। ये रात्रि को ट्रेन का मेरा पहला सफर था।
सुबह 08:00 AM दिनांक 0604.2024 को हम हिमाचल पहुंचते ही जो सबसे खुबसुरत दरयिा था वो नागल डेम का था जो देखने की आकर्षक था पहाडो की
सुन्दरता वहा के घर खेत सब कुछ मेरे लिए बहुत अलग व आकर्षक थे 08:20
AM पर हमारा ट्रेन का सफर अम्ब आकर समाप्त हुआ स्टेशन से हम ऑटो से
बस स्टैण्ड के लिए निकले। सबसे अच्छी बात यह लगी मुझे कि वहा के लोगो
को व्यवहार बहुत अच्छा था। अम्ब से हमने बलाहार के लिए बस ली अनुरोध करके
हम बस के आगे वाली सीट पर बैठ गए क्योकि सफर 2 घण्टे का था और
हिमाचल की घूमावदार सडको की वजह से सर बहुत चक्कर गया था। थक्कान के
कारण ये दो घण्टे निंद मे गुजर गए और हम बहलाहर पहुंच गये। वह पर पहुंचने
पर सब कुछ गोल-गोल दिखाई दे रहा था। वहा से बलहार गेस्ट हाउस तक
पुरुषोतम महोदय के साथ का समय बहुत अच्छा था। 11:00 AM पर हम गेस्टपुरुषोतम महोदय के साथ का समय बहुत अच्छा था। 11:00 AM पर हम गेस्ट हाउस पहुंचते ही बैग रखते ही पुरुषोतम महोदय ने अपने घर चाय पर आमन्त्रन भेजा। फिर हम सभी वहा पहुंचे। उनके घर मे महोदय की माता जी बच्चो और महोदय जी की पत्नी से मिलकर बहुत अच्छा अनुभब हुआ। हिमाचल में घर के भाव मिले चाय के बाद फिर सभी गेस्ट हाउस पहुंचे। फिर सबने अपने-अपने टिफिन खोले खाना खाकर सभी बैठे ही थे कि पुरुषोतम सर सर कर बुलावा आ गया व्यास नदी के भ्रमण के लिए सभी के चहरे थक्कान से उतरे हुए थे। परंतु नदी के सौन्द्रय को देखकर सब अपनी थक्कान को भूल गए पहाड से आता हुआ स्वादिष्ट मिठा जल फिर नदी के रंगो से भरे पत्थर और फिर नदी में स्नान। सब कुछ नया व अनुभवी था। सब का तो नही पता पर मेरा ये पहली बार था। मुझे तो बहुत अच्छा लगा सबने बहुत मस्ती की फिर स्नान के बाद फोटो किया उसके बाउ सभी दोपहर के खाने के लिए गए। फिर सभी ने साथ बैठकर भोजन किया भोजन के पश्चात वापिस गेस्ट हाउस आ गये ।
उसके बाद स्नान कर सभी ने विश्राम किया उसके बाद सायकाल को सभी तैयार होकर शिव मन्दिर के लिए निकले जो 5 किलोमिटर दूर था। सभी ने कुछ दूरी तय की परंतु सूरज डूबने को था तो सभी ने रास्ते से वापिस लौटने को निर्णयन किया। रास्ते में हमे एक अंकल मिल बबलु अंकल जिन्होने हमे गेस्ट हाउस तक लिफट दी । और मजे की बात यह थी अंकल गेस्ट हाउस तक छोडने आए और उनको हम
फिर वापिस शिव मन्दिर ले गये। जो सबसे अच्छा समय था रात को पहाडो का सफर दर्शन बहुत अच्छे से हुए फिर सभी वापिस गेस्ट हाउस आ गये। अंकल को धन्यवाद बोला फिर सभी खाना खा कर सो गये। उसके बाद अगले दिन सुबह ज्वाला जी माता के दर्शन के लिए गये जोकि बहुत अच्छे से हो गये उसके बाद सभी ने दरबारा मे ही भोजन किया भोजन के बाद सभी बस से चामून्डा माता जी के दर्शन के लिए निकले रात्रि मे मन्दिर का दर्शय सौन्द्रय पूर्व था। दर्शन के बाद सभी पास होटल में रूके सुबह 04:00 AM बजे वहां से मन्डी के लिए निकले जिसके लिए हमने कैब बुक की Tour का सबसे सुन्दर स्थान मेरे लिए मन्डी का था। जो कि बहुत ही सुन्दर था मन्डी मे झरना स्टेडीयम वहा के पहाड लोग सब कुछ बहुत अच्छा था। उसके बाद हम बस से अम्ब पहुंचे। अम्ब से ट्रेन से रात्रि 09:00 PM बजे सभी कुरूक्षेत्र पहूचे फिर सभी अपने-अपने घर चले गये Tourकुछ बहुत अच्छा था। उसके बाद हम बस से अस्ब पहुंचे। अम्ब से ट्रेन से रात्रि 09:00 PM बजे सभी कुरुक्षेत्र पहूचे फिर सभी अपने-अपने घर चले गये Tour का ये सफर बहुत अच्छा था। सभी ने बहुत मस्ती की और इस प्रकार Tour की यात्रा समाप्त हुई
Name: Kavita
PGDKTSI
Sem: II
Class Roll No:7

Leave a Reply