लेखक: vinodvyas

  •          हिम्मत सिंह सिन्हा जी के व्यक्तित्व का सांस्कृतिक पक्ष

             हिम्मत सिंह सिन्हा जी के व्यक्तित्व का सांस्कृतिक पक्ष          हिम्मत सिंह सिन्हा जी के व्यक्तित्व का सांस्कृतिक पक्ष– आधुनिक कुरुक्षेत्र के मानुष-रत्नों में प्रोफेसर हिम्मत सिंह सिन्हा जी का नाम अग्रगण्य है। हिम्मत सिंह सिन्हा जी  केवल एक सरकारी कर्मचारी ही नही अपितु सामाजिक, दार्शनिक, सांस्कृतिक पक्षों के साथ-साथ  व योगमय जीवन को…

  • श्राद्ध/ Shraddh

    श्राद्ध पक्ष श्राद्ध/ Shraddh- श्राद्धशब्द का अर्थ पूर्वजों के प्रति श्रद्धापूर्वक अर्पण किए गए भाव से है। श्राद्ध भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है जिसमें हम अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन करते हैं व उन्हें स्मरण करते हैं । श्राद्ध पूर्वजों से जुड़ने का एक अनुपम उपाय है जिसमें हम भावी पीढ़ी को हमारे…

  • संस्कृत कैसे सीखे ?

    संस्कृत कैसे सीखे ?  संस्कृत सीखने के विभिन्न उपाय है। संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। भारत में बोले जाने वाली अनेक भाषाओं में संस्कृत के शब्द विद्यमान है, वह अनेक शब्द ऐसे हैं जिनकी उत्पत्ति संस्कृत मूल के शब्दों से हुई है इसीलिए प्रत्येक भाषा को जानने वाले को संस्कृत सीखना सरल आवश्यक प्रतीत…

  • ऑपरेशन सिन्दूर पर कविता

    ऑपरेशन सिन्दूर पर कविता- ऑपरेशन सिन्दूर’साम्प्रदायिक क्रूरता के अन्त का उद्घोष है, मेक इन इंडिया  हथियारों के  सफल परीक्षण का जयघोष है। हिन्दू नारी के विरुद्ध  षड्यन्त्रों के समापन का आरम्भ है, विकसित भारत के भव्य–भवन की  नीव का प्रारंभ है। विश्व–शान्ति व मानव–कल्याण की भावना का उदात समर्थन है, उत्तम सैन्य–पराक्रम, शौर्य ,रण–कौशल का…

  •    ऑपरेशन सिंदूर –आतंकवाद के विरुद्ध भारत की नीति को पुनर्भाषित करना,   ऑपरेशन सिंदूर पर कविता

       ऑपरेशन सिंदूर –आतंकवाद के विरुद्ध भारत की नीति को पुनर्भाषित करना- प्रस्तावना व नामकरण  २२-०४-२०२५ को कश्मीर की पहलगाम घाटी में निरपराध व पूर्णत: आश्वस्त होकर अपने परिवार, बच्चों व इष्ट मित्रों के साथ प्रकृति की गोद में भ्रमण कर रहे भारतीय हिंदू पर्यटकों पर आतंकियों द्वारा पहलगाम में किये गये अमानवीय, क्रूर व…

  • 🪔ऑपरेशन सिंदूर का सांस्कृतिक विश्लेषण व भारतीय संस्कृति, नारी अस्मिता

    (भारतीय संस्कृति, नारी अस्मिता और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक) प्रस्तावना व नामकरण हाल ही में दिनांक २२-०४-२०२१ को कश्मीर की पहलगाम घाटी में निरपराध व पूर्णतः आश्वस्त होकर अपने इष्ट मित्रों, पत्नी व बच्चों के साथ प्रकृति की गोद में भ्रमण कर रहे भारतीय हिंदू पर्यटकों पर आतंकियों ‌द्वारा किया गया अमानवीय, क्रूर व कुत्सित…

  • अन्तराष्ट्रीय गीता जयन्ती महोत्सव,ब्रह्मसरोवर, कुरुक्षेत्र / International Geeta Jayanti

    गीता जयन्ती महोत्सव के विविध रंग Anju Rani कोमल शर्मा नाम- मोनिका चट्ठाविषय- गीता जयंती में बाजार दर्शन गीता महोत्सव एक कार्यक्रम है जो भगवद्गीता उपदेश की तिथि से संबंधित है। यह हिदूं कैलेंडर के मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। 2016 में हरियाणा सर्कार ने 6 से 10 दिसंबर…

  • महाभारत में अनुसन्धान के विषय एवं उपविषय

    महाभारत में वर्णित विविध विषय महाभारत में राज्य व प्रशासनिक तथ्य महाभारत में ज्योतिष व खगोल महाभारत में भूगोल महाभारत में शिक्षा महाभारत में अर्थ चिन्तन महाभारत में ऐतिहासिकता का वर्णन महाभारत में भौगोलिक सीमायें महाभारत में वर्णित पर्यावरण के स्वरूप महाभारत में संस्कृति के विविध रूप महाभारत में दार्शनिक तथ्य महाभारत में विविध विद्यायें…

  • संस्कृतवाङ्‌मये ज्ञानविज्ञानपरम्परायां विविधविषया:-

    संस्कृतवाङ्‌मये खगोलविज्ञानम्। संस्कृतवाङ्‌मये नक्षत्रविद्या । संस्कृतवाङ्‌मये भूगोलतथ्यानि। संस्कृतवाङ्‌मये नित्योपयोगीनि आयुर्वेदसूत्राणि। धर्मग्रन्थेषु संस्कारा: तन्महत्त्वञ्च। संस्कृतवाङ्‌मये वास्तुशास्त्रपरम्परा । संस्कृतवाङ्‌मये जलसंरक्षणसूत्राणि। संस्कृतवाङ्‌मये नारीसुरक्षासूत्राणि। संस्कृतवाङ्‌मये पर्यावरणसंरक्षणसूत्राणि। संस्कृतवाङ्मये राजनीतिसू‌त्राणि। संस्कृतवाङ्‌मयस्थ- विभिन्ननीतिग्रन्थेषु छात्रोपयोगिसूत्राणि। गीतायां छात्रकल्याणसूत्राणि । धर्मग्रन्थेषु छात्रकल्याणसूत्राणि विद्यार्थिन: नियमाश्च। संस्कृतेअनुसन्धानपरम्परा । संस्कृते गणितस्याध्ययनाध्यापनपरम्परा । संस्कृते गणितस्य प्रसिद्धग्रन्था: ग्रन्थकाराश्च। नीतिग्रन्थेषु आचारोपदेश:। संस्कृत एवं योगशास्त्रम् श्रीमद्भगवद्गीता एवं विविधयोगा:

  • नामकरण में आती हुई विकृतियां, नामकरण संस्कार

                                                                                   (कुछ भी नाम रख रहे हैं माता पिता)                                                         संसार में किसी भी व्यक्ति वस्तु या स्थान का कोई न कोई नाम रखा जाना आवश्यक है बिना नाम या उपाधि के संसार में व्यवहार सम्भव नहीं है, इसीलिए नाम को एक संस्कार के रूप में जाना जाता है। नाम से ही व्यक्ति संसार…

hi_INHindi