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Category: Blog
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ज्ञान परम्परा में आनन्दवर्धन व ध्वनि
आनन्दवर्धन के मत में ध्वनि आनंदवर्धन ध्वनि के प्रवर्तक आचार्य कहे जाते हैं। आनंदवर्धन के अनुसार ध्वनि वह विशेष अर्थ है जो कि काव्य की आत्मा है। यह ध्वनि मुख्यार्थ से व लक्ष्यार्थ से सर्वथा भिन्न होती है। ध्वनि एक ऐसा प्रतिमान अर्थ है जो महाकवियों की वाणी में स्वत: होता है। यह अर्थ…
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बौद्धमत में आर्यसत्य
बौद्ध मत में आर्यसत्य हैं– (1) दुःख : संसार में दुःख है, (2) समुदय : दुःख के कारण हैं, (3) निरोध : दुःख के निवारण हैं, (4) मार्ग : निवारण के लिये अष्टांगिक मार्ग हैं। इसके आठ अंग हैं– सम्यक् दृष्टि सम्यक् संकल्प सम्यक् वचन सम्यक् कर्म सम्यक् आजीविका सम्यक् व्यायाम सम्यक् स्मृति सम्यक् समाधि।…
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जैनदर्शन में रत्नत्रय
जैनदर्शन में रत्नत्रय-सम्यक् दर्शन सम्यक् ज्ञान सम्यक् चरित्र इन तीनों को जैन दर्शन में रत्नत्रय की संज्ञा दी गई है। इन तीनों को मोक्ष का मार्ग कहा गया है। “सम्यक्दर्शनज्ञानचरित्राणि मोक्षमार्ग:” सम्यक दर्शन– जैन शास्त्रों में कहे गए तत्वों में श्रद्धा रखना ही सम्यक दर्शन कहलाता है। अथवा जैन आचार्य व जैन मुनियों के…
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भारतीय संस्कृति में ज्योतिष का योगदान-
भारतीय संस्कृति में ज्योतिष का योगदान- वेद के 6 अंगों में ज्योतिष एक प्रमुख अंगों के रूप में प्रतिष्ठित है ।ज्योतिष के द्वारा ही काल का विधान किया जाता है। भारतीय संस्कृति का संरक्षक ज्योतिष शास्त्र है । ज्योतिष के द्वारा ही भारतीय संस्कृति में विभिन्न पर्वों , त्योहारों, व्रतों , उत्सवों आदि का काल…
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टोडारायसिंह की जल संरक्षण परम्परा
* टोडारायसिंह की जल संरक्षण परम्परा” पंचमहाभूती (जल-अग्नि वायु-पृथ्वी आकाश) के प्रति देवत्व बुद्धि व श्रद्धा भाव भारतवर्ष की परंपरा व संस्कृति का एक हिस्सा है. इसलिए जल आदि तत्वों को देवता मानकर इनका पूजन व संरक्षण समय भारत में क्षेत्रीय परम्परा के अनुसार होता चला आया है। राजस्थान में वर्षा के असमान वितरण व…
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प्रकृति की शरण में चलें
“आयुर्वेदिक जीवन” प्रकृति की शरण में चलें (प्राकृतिका: भवाम🙂 वैज्ञानिक उन्नति के साथ साथ ही मानव समाज को विभिन्न समस्याएं मुफ्त में मिली है आज हर कोई मानसिक तनाव खराब स्वास्थ्य के दौर से गुजर रहा है ऐसे में प्रकृति की शरण ही हमें बचा सकती है इसलिए हम प्रत्येक सकता है…
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मदनमोहनमालवीय:( संस्कृति व गुरुकुल शिक्षा के समर्थक व स्थापक)
मदनमोहनमालवीय: ( गुरुकुलशिक्षाया: समर्थक: स्थापकश्च) मालिनि वसुशशिनवचन्द्रे(१९१८) वत्सरे पौषमासे तदनु वसुतिथौ(८) हि वासरे चन्द्रसूनोः। हरिभजनरताया:”मोना” देव्या: प्रसूति: तनयमदनमोहन: मालवीयो प्रसिद्ध:।। हिन्दी- हरि के भजन में निमग्न रहनें वाली भक्तिमति मोना देवी के गर्भ से मदन मोहन मालवीय जी का जन्म संंवत्सर 1918 के पौष महीने की अष्टमी तिथि को सोमवार के दिन हुआ। …
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“भारतीय ज्ञान परम्परा की स्वर्ण धरोहर”
“भारतीय ज्ञान परम्परा की स्वर्णधरोहर” स्वर्ण -धरोहर याद करें ,नवभारत के निर्माण को। मातृभूमि पर गर्व करें ,करें समर्पित प्राण को।। वेद-पुराणों उपनिषदों के मंत्रों का जो ज्ञान है सूत्र रूप में छुपा हुआ है यहां सारा विज्ञान है महाभारत गीता रामायण के श्लोकों का जो सार है वही वर्तमान पीढ़ी के दुखों का…
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वेदांग परिचय
वेदांग परिचय ज्ञान के समूह को वेद कहा गया है वेदों का विभाजन वेद व्यास ने चार भागों में किया ,जिनका नाम है क्रमशः ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद व अथर्ववेद। इन वेदों के छह अंग कह गए हैं इन 6 अंगों में क्रमशः है व्याकरण, निरुक्त, कल्प, ज्योतिष, छन्द, व शिक्षा है। ये छ अंग वेद…
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गणित व संस्कृत
गणित व संस्कृत गणित के क्षेत्र में भारत का कोई जवाब नहीं है। गणित के अनेक रहस्य संस्कृत के ग्रन्थों में विद्यमान है। आर्यभट्ट का आर्यभट्टीय एवं वराहमिहिर का पंंचसिद्धांतिका , भास्कराचार्य का सिद्धांत शिरोमणि बीजगणितम लीलावती आदि समस्त गणित के ग्रंथ अद्भुत व अद्वितीय है। इसलिए गणित के अध्ययन का माध्यम संस्कृत समुचित है।यद्यपि…
