Category: Blog

  • ज्ञान परम्परा में कालिदास के नाटक

    मालविकाग्निमित्रम् ज्ञान परम्परा में कालिदास के नाटक-इसमें ५ अंकों में मालविका और अग्निमित्र के प्रणय और विवाह का वर्णन है। मालविका विदर्भराजपूत्र माधवसेन की बहिन है। दायादों द्वारा राज्य अपहृत होने पर अमात्य सुमति मालविका को सुरक्षित रखने के लिए छिपा कर लाता है। वन में डाकुओं के द्वारा सुमति की हत्या कर दी जाती…

  • ज्ञान परम्परा में भवभूति व उनके नाटक

     ज्ञान परम्परा में भवभूति व उनके नाटक- मालतीमाधवम् , यह १० अंकों का प्रकरण  है। इसमें मंत्री पुत्र नायक है ।इसमें मालती और माधव तथा मकरन्द और मदयन्तिका के प्रणय और परिणय का वर्णन है। अंकानुसार कथा इस प्रकार है– (अंक १) माधव विदर्भ राज के मन्त्री देवराज का पुत्र है और मालती पद्मावती-नरेश के…

  • शूद्रक व मृच्छकटिक की संक्षिप्त-कथा

    शूद्रक व मृच्छकटिक की संक्षिप्त-कथा  इस प्रकरण में १० अंक हैं। यह रूपक का एक भेद ‘प्रकरण’ है। इसमें एक निर्धन ब्राह्मण चारुदत्त ( सामान्य नायक धीर प्रशांत प्रकृति   )का वसन्तसेना नामक गणिका (वेश्या) से प्रेम-वर्णन है। अन्त में दोनों का प्रेम सफल होता है और वसन्तसेना का चारुदत्त से विवाह होता है। साथ ही…

  •  भास व उसके नाटक

       भास व उसके नाटक भास के १३ नाटक भास के नाटकों को कथा-स्रोत की दृष्टि से चार भागों में बाँटा जा सकता है। (1) उदयन-कथा-मूलक–(१) प्रतिज्ञायौगन्धरायण, (२) स्वप्नवासवदत्तम् ।  (2) महाभारत-मूलक-(३) ऊरुभंग, (४) दूतवाक्य, (५) पञ्चरात्र, (६) बालचरित, (७) दूतघटोत्कच, (८) कर्णभार, (९) मध्यमव्यायोग। ( ) (3) रामायण-मूलक–(१०) प्रतिमानाटक, (११) अभिषेकनाटक ।  (4) कल्पना-मूलक–(१२)…

  • भारतीय ज्ञान परंपराओं में भारवि

    भारतीय ज्ञान परंपराओं में भारवि  किरातार्जुनीयम् की संक्षिप्त कथा इसमें कौरवों पर विजय-प्राप्ति के लिए व्यास मुनि के उपदेश अनुसार अर्जुन का हिमालय पर्वत पर जाकर तपस्या करने, किरात-वेषधारी शिव से युद्ध और प्रसन्न शिव से पाशुपत अस्त्र की प्राप्ति का वर्णन है। सर्गानुसार संक्षिप्त कथा इस प्रकार है : सर्ग १-दूत वनेचर का आकर…

  • अश्वघोष

              बुद्धचरितम् का परिचय व वर्ण्य विषय बुद्धचरित यह एक महाकाव्य है। इसमें बुद्ध का जीवन-चरित तथा उनके सिद्धान्त वर्णित हैं । इसमें बुद्ध के जन्म से लेकर महानिर्वाण तक की कथा वर्णित है। इस महाकाव्य में मूल रूप में २८ सर्ग थे। चीनी और तिब्बती भाषा में किए गए इसके २८ सर्गों के अनुवाद…

  • भारतीय ज्ञान परंपराओं में कालिदास

    भारतीय ज्ञान परंपराओं में कालिदास  भारतीय ज्ञान परंपराओं में कालिदास- संस्कृत साहित्य की विभिन्न विधाओं में पारंगत वी अद्वितीय कवि ही कवि कुलगुरू कालिदास है कालिदास को कवि शिरोमणी कहा गया है कालिदास ने संस्कृत नाटक संस्कृत महाकाव्य व खंडकाव्य की रचना की है जिनमें सुप्रसिद्ध नाटक अभिज्ञान शाकुंतलम् व सुप्रसिद्ध महाकाव्य रघुवंशम् सम्मिलित है…

  • भारतीय संस्कृति में जन्मोत्सव/ जन्मदिन की परम्परा-

    भारतीय संस्कृति में जन्मोत्सव/ जन्मदिन की परम्परा- जन्मोत्सव अथवा जन्मदिवस के अभिनंदन की परम्परा विशुद्ध रूप से भारतीय है। भारतीय शास्त्रों में इसके प्रमाण प्राप्त होते है। कवि कुलगुरू कालिदास विरचित कुमारसंभव में एक पंक्ति प्राप्त होती है जिसमें भगवान शंकर पार्वती के जन्मोत्सव की बात करते हैं, इसके अतिरिक्त संस्कृत नाटकों में भी जन्मोत्सव…

  • भारतीय संस्कृति व गीता-

    भारत में गीता अध्ययन की परंपरा- भारत में गीता अध्ययन की परंपरा- भारतीय संस्कृति व गीता- भारत के गुरुकुलों की परंपरा के समय में श्रीमद् भागवत गीता के नियमित अध्ययन व पाठ की परंपरा रही है भारत के युवा श्रीमद्भगवत गीता के नियमित पाठ व नियमित व्यायाम को अपना दिनचर्या में शामिल मानते थे।श्रीमद्भगवद्गीता का…

  • वर्तमान शिक्षा व ब्रह्मचर्य

    वर्तमान शिक्षा व ब्रह्मचर्य भारतीय संस्कृति व  “ब्रह्मचर्य” –   भारतीय संस्कृति व  “ब्रह्मचर्य” –   विद्याध्ययन की गुरुकुल परम्पराओं में छात्रों हेतु अनिवार्य नियम, ब्रह्मचर्य रहा है। ब्रह्मचर्य के बिना जीवन की अन्य अवस्थाओं का दुखयुक्त होना निश्चित है, इसलिये श्रौतसूत्रों  व धर्मग्रन्थों में ब्रह्मचर्य को प्रथम आश्रम माना गया है। मानव जीवन के प्रमुख उद्देश्यों की…

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