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Author: manojkumarvyas21
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संस्कृत गांव जहां आज भी संस्कृत संभाषण होता है
संस्कृत गांव जहां आज भी संस्कृत संभाषण होता है, भारतवर्ष में आज भी कुछ ऐसे गांव विद्यमान है जहां के मूल निवासी सामान्य व्यवहार के लिए भी संस्कृत में संभाषण करते हैं इस प्रकार के गांव में सर्वप्रथम नाम आता है दक्षिण भारत के कर्नाटक के चिकमगलूर जिले के शिमोगा के पास में मुत्तुर गांव।…
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विष्णु सहस्त्रनाम के पाठ का महत्व
विष्णु सहस्त्रनाम के पाठ का महत्व- वेदव्यास द्वारा लिखित महाभारत के अंदर विष्णु सहस्त्र नाम का मूल पाठ प्राप्त होता है विष्णु सहस्त्र नाम में भगवान विष्णु के 1000 नाम का संग्रह है विष्णु सहस्त्रनाम में अनुपस्थुप छन्द है वह इसमें जो चांद दिए हैं वह इस प्रकार से निबंध किए गए हैं कि इनका…
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ज्ञान परम्परा में कालिदास के नाटक
मालविकाग्निमित्रम् ज्ञान परम्परा में कालिदास के नाटक-इसमें ५ अंकों में मालविका और अग्निमित्र के प्रणय और विवाह का वर्णन है। मालविका विदर्भराजपूत्र माधवसेन की बहिन है। दायादों द्वारा राज्य अपहृत होने पर अमात्य सुमति मालविका को सुरक्षित रखने के लिए छिपा कर लाता है। वन में डाकुओं के द्वारा सुमति की हत्या कर दी जाती…
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ज्ञान परम्परा में भवभूति व उनके नाटक
ज्ञान परम्परा में भवभूति व उनके नाटक- मालतीमाधवम् , यह १० अंकों का प्रकरण है। इसमें मंत्री पुत्र नायक है ।इसमें मालती और माधव तथा मकरन्द और मदयन्तिका के प्रणय और परिणय का वर्णन है। अंकानुसार कथा इस प्रकार है– (अंक १) माधव विदर्भ राज के मन्त्री देवराज का पुत्र है और मालती पद्मावती-नरेश के…
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शूद्रक व मृच्छकटिक की संक्षिप्त-कथा
शूद्रक व मृच्छकटिक की संक्षिप्त-कथा इस प्रकरण में १० अंक हैं। यह रूपक का एक भेद ‘प्रकरण’ है। इसमें एक निर्धन ब्राह्मण चारुदत्त ( सामान्य नायक धीर प्रशांत प्रकृति )का वसन्तसेना नामक गणिका (वेश्या) से प्रेम-वर्णन है। अन्त में दोनों का प्रेम सफल होता है और वसन्तसेना का चारुदत्त से विवाह होता है। साथ ही…
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भास व उसके नाटक
भास व उसके नाटक भास के १३ नाटक भास के नाटकों को कथा-स्रोत की दृष्टि से चार भागों में बाँटा जा सकता है। (1) उदयन-कथा-मूलक–(१) प्रतिज्ञायौगन्धरायण, (२) स्वप्नवासवदत्तम् । (2) महाभारत-मूलक-(३) ऊरुभंग, (४) दूतवाक्य, (५) पञ्चरात्र, (६) बालचरित, (७) दूतघटोत्कच, (८) कर्णभार, (९) मध्यमव्यायोग। ( ) (3) रामायण-मूलक–(१०) प्रतिमानाटक, (११) अभिषेकनाटक । (4) कल्पना-मूलक–(१२)…
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भारतीय ज्ञान परंपराओं में भारवि
भारतीय ज्ञान परंपराओं में भारवि किरातार्जुनीयम् की संक्षिप्त कथा इसमें कौरवों पर विजय-प्राप्ति के लिए व्यास मुनि के उपदेश अनुसार अर्जुन का हिमालय पर्वत पर जाकर तपस्या करने, किरात-वेषधारी शिव से युद्ध और प्रसन्न शिव से पाशुपत अस्त्र की प्राप्ति का वर्णन है। सर्गानुसार संक्षिप्त कथा इस प्रकार है : सर्ग १-दूत वनेचर का आकर…
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भारतीय ज्ञान परंपराओं में कालिदास
भारतीय ज्ञान परंपराओं में कालिदास भारतीय ज्ञान परंपराओं में कालिदास- संस्कृत साहित्य की विभिन्न विधाओं में पारंगत वी अद्वितीय कवि ही कवि कुलगुरू कालिदास है कालिदास को कवि शिरोमणी कहा गया है कालिदास ने संस्कृत नाटक संस्कृत महाकाव्य व खंडकाव्य की रचना की है जिनमें सुप्रसिद्ध नाटक अभिज्ञान शाकुंतलम् व सुप्रसिद्ध महाकाव्य रघुवंशम् सम्मिलित है…
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भारतीय संस्कृति में जन्मोत्सव/ जन्मदिन की परम्परा-
भारतीय संस्कृति में जन्मोत्सव/ जन्मदिन की परम्परा- जन्मोत्सव अथवा जन्मदिवस के अभिनंदन की परम्परा विशुद्ध रूप से भारतीय है। भारतीय शास्त्रों में इसके प्रमाण प्राप्त होते है। कवि कुलगुरू कालिदास विरचित कुमारसंभव में एक पंक्ति प्राप्त होती है जिसमें भगवान शंकर पार्वती के जन्मोत्सव की बात करते हैं, इसके अतिरिक्त संस्कृत नाटकों में भी जन्मोत्सव…
