Your cart is currently empty!
बदलता भारत व सांस्कृतिक पुनर्जागरण
बदलता भारत व सांस्कृतिक पुनर्जागरण
(सैन्य कार्यवाही व नारी सुरक्षा के विशेष परिप्रेक्ष्य में)
अब भारत बदल रहा है, निज गौरव में ढल रहा है।
विकसित राष्ट्र बनाने को एक बीज फिर से पल रहा है।।
पिछले ११ वर्षों से नरेन्द्र मोदी जी के कार्यकाल में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का युग आरम्भ हुआ है। अनेक मानदंड इस प्रकार दिखाई पड़ते हैं जिनसे यह सिद्ध है कि भारतीय युवाओं में सांस्कृतिक जागरण व संस्कृति के प्रति श्रद्धा- भाव उत्पन्न हुआ है। सभी जगह संस्कृति शब्द सुनाई देने लगा है। युवा परम्परागत प्रतीकों व संस्कृत के वाक्यों को टैटू के रूप में गुदवा रहे हैं। वैदिक विवाह, वैदिक प्री- वेडिंग, वैदिक ड्रेस-अप, वैदिक नामकरण जैसे आयोजन बढ़ रहे हैं। सरकार के प्रत्येक व्यवहार में संस्कृति की झलक दिखाई पड़ती है, चाहे त्योहारों का आयोजन हो, महाकुंभ का आयोजन हो अथवा सैन्य कार्यवाही हो। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वयं राम मंदिर के शिलान्यास के अवसर पर कहा है कि 5 अगस्त भारतीय सांस्कृतिक स्वतंत्रता का दिवस है।
ऑपरेशन सिंदूर व भारतीय संस्कृति –
हाल ही में दिनांक २२-०४-२०२५ को कश्मीर की पहलगाम घाटी में निरपराध व पूर्णतः आश्वस्त होकर अपने इष्ट मित्रों, पत्नी व बच्चों के साथ प्रकृति की गोद में भ्रमण कर रहे भारतीय हिंदू पर्यटकों पर आतंकियों द्वारा में किये गये अमानवीय, कूर व कुत्सित कृत्य के विरुद्ध भारतीय सेना की एक सैन्य कार्यवाही का नाम ऑपरेशन सिन्दूर रखा गया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अनेक बार यह कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्यवाही नहीं है अपितु यह भारत की भावनाओं का सम्मान व नारी सुरक्षा की सनातन परंपराओं का निर्वाह है। भारतीय संस्कृति में नारी की अस्मिता, चरित्रता, पवित्रता व उसकी गरिमा की रक्षा हेतु ही महाभारत व रामायण जैसे युद्ध हो गए हैं. ऐसे में वर्तमान सरकार ने सैन्य कार्यवाही का नाम ऑपरेशन सिंदूर रख करके नारी अस्मिता की इसी सनातन परम्परा का निर्वाहन किया है।
भारतीय नारी में सिंदूर के प्रति पुनः विश्वास का प्रतीक है ‘ऑपरेशन सिंदूर’ –
ऑपरेशन सिन्दूर से महिलाओं में सिन्दूर के प्रति पुनः विश्वास उत्पन्न हुआ है। भारतीय संस्कृति में नारी के 16 श्रृंगार में सिन्दूर का प्रमुख महत्व है। सिंदूर भारतीय महिलाओं के लिए उनके पति की सुरक्षा व अस्तित्व का प्रतीक है। यद्यपि वर्तमान समय में पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव व तथाकथित सम्प्रदायों व समाज सुधारकों के प्रभाव में आकर भारत की कई नारियां मांग में सिंदूर भरना छोड़ रही थी परन्तु ऑपरेशन सिंदूर के बाद उनका सिन्दूर के प्रति आस्था भाव पुनः उत्पन्न हुआ है,जो महिलाएं सिंदूर का प्रयोग नहीं कर रही थी वे भी अब सिंदूर का प्रयोग करने लगी है। व्यक्तिगत तौर पर मैं अनेक महिलाओं को जानता हूं जो विवाहित होने पर भी अपनी मांग में सिंदूर नहीं भर रही थी परंतु ऑपरेशन सिंदूर के बाद उन्हें मांग में सिन्दूर भरते हुए देखा है।
सैन्य शौर्य व पराक्रम, नारी अस्मिता का रक्षण ।
शत्रुदल का कर दमन, सिन्दूर वो ही खिल रहा है।।
अब भारत बदल रहा है, निज गौरव में ढल रहा है।
विकसित राष्ट्र बनाने को एक बीज फिर से पल रहा है।।
भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक है ‘ऑपरेशन सिन्दूर’-
भारतीय संस्कृति की परिभाषा को एक वाक्य में कहें तो वह वाक्य है नारी की सुरक्षा व पवित्रता’। भारतीय संस्कृति में नारी की अस्मिता, पवित्रता व उसकी गरिमा की रक्षा के लिए महायुद्ध हुए हैं परंतु वर्तमान समय में नारी के प्रति किए जा रहे कूर कृत्यों, छलपूर्वक किये जा रहे दुष्कर्मों के समाचारों से सोशल मिडिया व अखबारों के पन्ने भरे पड़े हैं, ऐसे समय में सैन्य कार्यवाही का नाम भारतीय नारी के सम्मान व अस्तित्व से जोडकर रखना गर्व व सांस्कृतिक पुनरुदय का प्रतीक है। ऑपरेशन सिंदूर के पश्चात सिन्दूर केवल नारी की मांग तक सीमित नही रह गया है अपितु यह एक क्रान्ति व पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुका है। सिन्दूर के पेड़ लगाये जा रहें है, करनाल में सिन्दूर नाम से आम की नई किस्म विकसित की गयी है।
लव जिहाद कानून व नारी सुरक्षा –
नारी भारतीय संस्कृति का प्रमुख स्तंभ है, इसकी चरित्रता, पवित्रता व मर्यादा की रक्षा केवल भारतीय संस्कृति व शास्त्रों का विषय नही अपितु संविधान में भी उसकी मर्यादा की रक्षा की बात कही गई है। वर्तमान सरकार ने इस तथ्य को आत्मसात करते हुये नारी सुरक्षा हेतु महत्त्वपूर्ण प्रयास किये है। भारत में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद नारी के विरुद्ध किए जा रहे विभिन्न षड्यंत्रों का पर्दाफाश होने लगा है, लव जिहाद प्रत्येक व्यक्ति के समझ में आने लगा है व सरकारों ने इसके विरुद्ध कानून बनानें आरम्भ कर दियें हैं । इतना ही नहीं नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद धर्माचार्यों व कथाकारों का भी इतना मनोबल बड़ा है कि वे भी लव जिहाद जैसे विषयों के प्रति खुलकर कहनें लगे हैं व बहनों को जागरूक करने लगें हैं। ऐसे ही अनेक विषय है जिस पर कोई बोलने की सोच नहीं सकता था वे भी धीरे-धीरे खुलकर बाहर आ रहें हैं व आम चर्चा का विषय बन रहें हैं।
निज भाषा के प्रति गौरव /भाषागत गुलामी से मुक्ति-
जिसकी भाषा मर गई उसकी संस्कृति मर गई, उसका गौरव मर गया।
एक समय था जब अंग्रेजी के अखबार को पढ़ना हिंदी के एक बार पढ़ने से ज्यादा वैदुष्य का प्रतीक माना जाता था, हिंदी मीडियम का मजाक बनता था, अंग्रेजी मानसिकता हावी थी परंतु शिक्षा नीति 2020 ने सब कुछ बदल के रख दिया है। लोगों की मानसिकता ही बदल गई है। मातृभाषा व Locality के प्रति हम फिर से बढ़ते जा रहें हैं। कानून, मेडिकल व इंजीनियरिंग जैसे विषयों का अब मातृभाषा में अध्ययन आरंभ हो रहा है। जिससे कठिन विषय भी सरलता के साथ बुद्धि में प्रवेश कर सकता है। युवाओं में भी मातृभाषा के प्रति उत्साह बढ़ रहा है। अनेक विश्वविद्यालय छात्रों को अपनी सरलता के अनुसार इच्छित भाषा में परीक्षा लिखने की स्वतंत्रता दे रहें हैं। प्राथमिक अध्ययन हेतु मातृभाषा को अनिवार्य कर दिया गया है।
स्वदेशी विचारों व उत्पादों का विस्तार–
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद विशेष रूप से कोरोना काल के समय उन्होंने कहा था कि अपने आप पर भरोसा ही हमें ख़ुशी दे सकता है (सर्वं आत्मवशं सुखम्) इसलिए आत्मनिर्भर भारत, वोकल फोर लोकल व मेक इन इंडिया जैसे अनेक प्रक्रम आरंभ किए गए हैं जिससे दवाइयों से लेकर सैन्य उपकरण, हथियार सहित विविध मशीनरी भारत में बनने लगी है। ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ मेक इन इंडिया हथियारों के सफल परीक्षण का जयघोष है।
सनातन मूल्य व sustainable development-
वर्तमान में प्रकृति के चहुंदिश ह्रास व विविध प्रदूषणों से मुक्ति हेतु सम्पूर्ण विश्व अब sustainable Development चाहता है जो कि आनें वाली पीढ़ी को एक सुरक्षित भविष्य दे सके ऐसी स्थिति में भारतीय सनातन मूल्य ही एकमात्र उपाय है। अन्नं न निन्द्यात् व जलं वरुणः जैसी वैदिक भावना ही sustainable Development के लक्ष्यों को प्राप्त करनें में सहायक है। अन्न की निंदा न करते हुए ही हम UNO के लक्ष्य 0 Hunger तक पहुंच सकते है। नरेंद्र मोदी जी ने अपने कार्यकाल में संपूर्ण विश्व में भारतीय संस्कृति व सनातन मूल्यों का उपस्थापन किया है उन्होंने वसुदेव कुटुंबकम, सर्वे भवंतु सुखिनः, एक विश्व एक स्वास्थ्य, योग दिवस आदि के माध्यम से भारतीय संस्कृति व परम्पराओं को समस्त विश्व के सामने रखा है।
राजा की संस्कृति के प्रति समझ का प्रतीक है ‘बदलता भारत’-
भारतीय नीति शास्त्रों में कहा गया है कि प्रजा की रक्षा राजा का परम कर्तव्य है। आने वाला समय व संस्कृति की रक्षा भी राजा के ही अधीन है अर्थात (राजा कालस्य कारणम्)। जैसा की समाचार पत्रों से ज्ञात है कि हाल ही में की गयी सैन्य कार्यवाही ऑपरेशन सिन्दूर का नामकरण स्वयं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने किया है इससे यह सिद्ध है कि राजा भारतीय संस्कृति की समझ के साथ ही उसकी रक्षा हेतु तत्पर है। राजा की सांस्कृतिक समझ का ही परिणाम है कि सैन्य कार्यवाही में भी संस्कृति समाहित है। स्वयं प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जी ने अनेक बार कहा है कि ऑपरेशन सिन्दूर केवल सैन्य कार्यवाही नहीं है अपितु यह भारत की भावना है, स्वाभिमान है, भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का जयघोष है। स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से दिए गए उनके भाषण में उन्होंने कहा कि हमें गुलामी की सारी बेडियां तोड़ देनी है।
इतिहासों का पुनर्लेखन, ज्ञान परम्पराओं का चिन्तन।
आत्मनिर्भर नाद लेकर राष्ट्र फिर से चल रहा है।।
अब भारत बदल रहा है, निज गौरव में ढल रहा है।
विकसित राष्ट्र बनाने को एक बीज फिर से पल रहा है।।
विनोद कुमार शर्मा

Leave a Reply